दुर्लभ पक्षी खरमोर के ब्रिडिंग की पहली बार होगी मॉनिटरिंग, मुख्य उद्देश्य विलुप्त प्रजाति को बचाना
अंडों को प्रजनन केंद्र में विकसित कर प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से वन विभाग अजमेर जिले के शुभांकर और दुर्लभ पक्षी खरमोर के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा। वैज्ञानिक तरीके से अंडों को करेंगे विकसितसंयुक्त टीम फील्ड में रहकर खरमोर के अंडे एकत्रित करेगी।
अजमेर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से वन विभाग अजमेर जिले के शुभांकर और दुर्लभ पक्षी खरमोर के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रहा है। आने वाले मानसून सीजन में विभाग, वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूआईआई) व बॉम्बे नेचूरल हिस्ट्री सोसायटी (बीएनएचएस) की संयुक्त टीम पहली बार खरमोर संरक्षण आरक्षित क्षेत्र पुष्कर रेंज के रक्षित वन खंड बीड़, अरवड़, गोयला, अधून वजीर खां व खीरिया के 931.007 हैक्टयेर वन क्षेत्र में खरमोर की ब्रिडिंग की मॉनिटरिंग करेगा। जून से अक्टूबर तक खरमोर का प्रजनन काल होता है। सिर्फ राजस्थान के कुछ भागों में ही खरमोर प्रजनन कर अंडे देते हैं। इसीलिए विभाग ने पहली बार खरमोर कंजर्वेशन ब्रिडिंग प्रोग्राम शुरू किया है। खरमोर के प्रजनन काल में संयुक्त टीम फील्ड में रहेगी। इनकी ब्रिडिंग पर नजर रखी जाएगी।
-वैज्ञानिक तरीके से अंडों को करेंगे विकसितसंयुक्त टीम फील्ड में रहकर खरमोर के अंडे एकत्रित करेगी। इन अंडों को अरवड़ वन खंड में स्थापित प्रदेश के एक मात्र खरमोर संरक्षण प्रजनन केंद्र में ले जाया जाएगा। यहां वैज्ञानिक तरीके से खरमोर के अंडों को नियंत्रित परिस्थितियों में विकसित कर पुन: इनके प्राकृतिक आवासों में छोड़ा जाएगा। इस पहल का मुख्य उद्देश्य खरमोर पक्षी की विलुप्त प्रजाति को बचाना है।
इनका कहना है
उप वन संरक्षक पी.बालामुरूगन ने बताया कि प्रधानमंत्री ने मन की बात में 'बस्टर्ड रिकवरी' प्रोग्राम की बात की थी, खरमोर कंजर्वेशन ब्रिडिंग प्रोग्राम उसी का एक भाग है। सोमवार को कार्यालय में बैठक लेकर डब्ल्यूआईआई तथा बीएनएचएस व विभागीय टीम को मानसून सीजन में खरमोर की ब्रिडिंग की मॉनिटरिंग के संबंध में दिशा निर्देश दिए गए हैं। इस मौके पर डब्ल्यूआईआई से मोहिब व हेमालथा तथा बीएनएचएस से प्रोजेक्ट साइंटिस्ट सुजीत नरवड़े आदि मौजूद रहे।
केंद्र में ये हैं सुविधाएं
यहां खरमोर के अंडों के लिए कृत्रिम ऊष्पायन के लिए ऊष्मायन कक्ष (इनक्यूबेशन रूम)।
प्रारंभिक आयु के महत्वपूर्ण चरण के दौरान चूजों के पालन के लिए एक चूजा पालन कक्ष।
वयस्क पक्षियों के आवास के लिए एक विशेष पिंजरा।
चिकित्सा के लिए एक चिकित्सा कक्ष।
पक्षियों की नियमित निगरानी के लिए निगरानी कक्ष।

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