सीजेपी का दावा: इस्तीफे के बिना सरकार के साथ बैठक का कोई मतलब नहीं, प्रधान को देना पड़ेगा इस्तीफा
मांग पूरी न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी
नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने कहा है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ेगा। उनके इस्तीफे के बिना सरकार के साथ बैठक का कोई मतलब नहीं है। सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने शनिवार को संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "कल की बैठक में मुआवज़े और कानूनी मामलों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। सैद्धांतिक रूप से सहमति बनी। हमें उम्मीद है कि आज वह लिखित समझौता भी मिल जाएगा, लेकिन मुख्य मांग प्रधान के इस्तीफ़े को लेकर कोई ठोस फ़ैसला नहीं हुआ है।" उन्होंने कहा, "कल हमने मुख्यधारा की मीडिया में देखा कि सूत्रों के हवाले से कहा गया था कि प्रधान इस्तीफ़ा नहीं देंगे। अगर प्रधान इस्तीफ़ा नहीं देते हैं, तो हमें बता दें। फिर इस तरह की बैठक का कोई मतलब नहीं है। हम अपनी भविष्य की रणनीति पर काम करेंगे।"
रांका ने कहा, "अगर सरकार का रवैया ऐसा ही रहा, तो हम कड़ा रुख अपनाने को मजबूर होंगे।" सरकार की ओर से राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के 47 अधिकारियों को हटाए जाने के मुद्दे पर उन्होंने कहा, "हमें कई विवरणों पर गौर करना होगा, लेकिन हम फिर से उसी बात पर चर्चा कर रहे हैं। अंतिम जवाबदेही शिक्षा मंत्री की है, क्योंकि पेपर लीक और राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) पेपर लीक के बाद विद्यार्थियों की आत्महत्या की घटनाओं वे सीधे तौर पर ज़िम्मेदार हैं।
उन्होंने कहा, "उन्हें इस्तीफ़ा देना होगा। हम लगातार अन्य व्यापक सुधारों पर चर्चा कर रहे हैं। कल हमने सरकार को मांगों का एक चार्टर भी सौंपा। इसे सरकार को सौंप दिया गया है।" सीजेपी की ओर से यह बयान ऐसे समय में आया है, जब सीजेपी और केंद्र सरकार के बीच आज तीसरे दौर की वार्ता होने वाली है। इससे पहले शुक्रवार को इस मुद्दे पर सीजेपी के प्रतिनिधि सौरव दास और रांका तथा केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा तथा जितेंद्र सिंह ने बातचीत की थी।

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