नाटो के भविष्य पर मंडराया संकट: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य खोलने के लिए मांगी सहयोगी देशों से मदद
ट्रंप की सहयोगियों को युद्धपोत भेजने की कड़ी चेतावनी
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक तेल आपूर्ति बहाल करने हेतु चीन, जापान और ब्रिटेन से होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्धपोत भेजने की मांग की है। उन्होंने सहयोग न करने पर नाटो के भविष्य को लेकर चेतावनी दी। ईरान ने वार्ता की पेशकश की है, लेकिन 20 जहाजों पर हमलों के बाद ऊर्जा संकट का खतरा गंभीर बना हुआ है।
वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की आशंकाओं के बीच कहा है कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देश इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सहयोगी देश मदद नहीं करते हैं तो नाटो के लिए भविष्य "बहुत खराब" हो सकता है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अब तक ऑस्ट्रेलिया और जापान ने स्पष्ट किया है कि वे फिलहाल अपने जहाज भेजने की योजना नहीं बना रहे हैं। ब्रिटेन ने कहा है कि वह विकल्पों पर विचार कर रहा है, जबकि चीन ने संघर्ष को तत्काल समाप्त करने का आह्वान किया है। इस बीच ईरान के विदेश मंत्री ने कहा है कि जो देश जलडमरूमध्य के सुरक्षित उपयोग को लेकर बातचीत करना चाहते हैं, उनके साथ तेहरान चर्चा के लिए तैयार है।
ब्रिटेन की समुद्री एजेंसी के अनुसार पिछले तीन दिनों में कोई नई घटना सामने नहीं आई है, लेकिन जलडमरूमध्य पर खतरा अभी भी "गंभीर" बना हुआ है। युद्ध शुरू होने के बाद से फारस की खाड़ी, होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी के आसपास कम से कम 20 जहाजों पर हमले हो चुके हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान द्वारा इस प्रमुख समुद्री मार्ग को बंद किए जाने से विश्व के लगभग पांचवें हिस्से की तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में तेज वृद्धि और ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गयी है। इसी बीच, ट्रंप ने कहा है कि इस मुद्दे पर चीन की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने संकेत दिया कि महीने के अंत में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ प्रस्तावित बैठक से पहले वह यह जानना चाहते हैं कि चीन जलडमरूमध्य को फिर से खोलने में सहयोग करेगा या नहीं।
उधर जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने कहा कि जापान ने फिलहाल नौसैनिक जहाज भेजने का कोई निर्णय नहीं लिया है और देश अपने कानूनी ढांचे के भीतर संभावित विकल्पों पर विचार कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया ने भी स्पष्ट किया है कि उसने इस मिशन में जहाज भेजने का कोई निर्णय नहीं लिया है।

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