आम बजट में सशक्तिकरण और समावेशन की गूंज : तेज, सतत और समावेशी विकास का रोडमैप, गरीब-किसान-युवा तक पहुंचेगा विकास; तस्वीरों में देखें बजट

‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ बजट का रोडमैप

आम बजट में सशक्तिकरण और समावेशन की गूंज : तेज, सतत और समावेशी विकास का रोडमैप, गरीब-किसान-युवा तक पहुंचेगा विकास; तस्वीरों में देखें बजट

आम बजट में सरकार ने रोजगार, एमएसएमई, इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और सशक्तिकरण पर फोकस रखते हुए तेज, सतत और समावेशी विकास का रोडमैप पेश किया।

नई दिल्ली। आम बजट के जरिए मोदी सरकार का केंद्रीय मंत्र “रिफॉर्म एक्सप्रेस” रहा, जिसके तहत रोजगार सृजन, एमएसएमई, सशक्तिकरण, मैन्युफैक्चरिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को प्राथमिकता दी गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आम बजट प्रस्तुत करते हुए भारत को “तेज़, सतत और समावेशी विकास” की राह पर आगे ले जाने का स्पष्ट रोडमैप रखा। सीतारमण ने कहा कि सरकार का फोकस केवल विकास दर पर नहीं, बल्कि रोजगार सृजन, क्षमता निर्माण और सभी वर्गों तक विकास के लाभ पहुंचाने पर है। यह बजट ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ की निरंतरता को दर्शाता है, जिसमें 350 से अधिक संरचनात्मक सुधार पहले ही लागू किए जा चुके हैं। 

वित्त मंत्री ने बताया कि बजट तीन प्रमुख कर्तव्यों से प्रेरित है पहला, आर्थिक विकास को तेज और टिकाऊ बनाए रखना,  दूसरा, लोगों की आकांक्षाओं को पूरा कर उनकी क्षमताओं का निर्माण करना और तीसरा, ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत के तहत सभी क्षेत्रों और समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करना।  सीतारमण ने कहा कि ‘रिफार्म एक्सप्रेस’ अपनी राह पर है और सरकार इस गति को बनाए रखेगी, सरकार का कर्तव्य यह सुनिश्चित करना है कि हर परिवार, समुदाय और वर्ग को संसाधनों, सुविधाओं एवं अवसरों तक पहुंच प्राप्त हो, सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि वृद्धि का लाभ हर किसान, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और युवा तक पहुंचे, जीएसटी, श्रम संहिता एवं गुणवत्ता नियंत्रण आदेश सहित कई सुधार 15 अगस्त से लागू किए जा चुके हैं। सरकार का कर्तव्य आर्थिक वृद्धि को गति देना और उसे बनाए रखना, लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना है, गरीब, वंचित और पिछड़े लोगों पर ध्यान देना सरकार का संकल्प है।

एमएसएमई को ‘चैंपियंस’ बनाने की पहल 

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बजट में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों ( एमएसएमई ) को अर्थव्यवस्था का मजबूत इंजन बताते हुए उनके लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। सरकार ने ‘चैंपियंस एमएसएमई’ पहल के तहत ₹10,000 करोड़ का एमएसएमई विकास फंड शुरू करने की घोषणा की है, जिससे संभावनाशील उद्यमों को इक्विटी सहायता मिलेगी। इसके अलावा, आत्मनिर्भर भारत निधि में ₹2,000 करोड़ का टॉप-अप देकर सूक्ष्म उद्यमों के लिए जोखिम पूंजी की उपलब्धता बढ़ाई जाएगी। बजट में ट्रेड्स प्लेटफॉर्म को और मजबूत करने, सरकारी खरीद में एमएसएमई की हिस्सेदारी बढ़ाने तथा भुगतान प्रणाली को तेज और पारदर्शी बनाने के उपायों का भी ऐलान किया है। इससे एमएसएमई सेक्टर की नकदी स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है। 

 इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड निवेश 

इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को गति देने के लिए बजट में सरकारी पूंजीगत व्यय को बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ करने का प्रस्ताव किया गया है। वित्त मंत्री ने बताया कि वर्ष 2014-15 में यह आंकड़ा ₹2 लाख करोड़ था, जो अब कई गुना बढ़ चुका है। सरकार टियर-2 और टियर-3 शहरों को नए विकास केंद्र के रूप में विकसित करने पर विशेष जोर दे रही है। मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए सेमीकंडक्टर मिशन 2.0, इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट निर्माण और बायो-फार्मा सेक्टर में बड़े निवेश की घोषणा की गई है। सरकार ने अगले पांच वर्षों में ₹10,000 करोड़ के परिव्यय से बायो-फार्मा शक्ति कार्यक्रम शुरू करने का भी ऐलान किया। 

 हर जिले में बनेगा एक गर्ल्स हॉस्टल 

बजट में गर्ल्स एजुकेशन को सपोर्ट करने के लिए हर जिले में एक लड़कियों का हॉस्टल बनाने की बात कही। वित्त मंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षा में, स्टीम संस्थानों में पढ़ाई के लंबे घंटे और लैब का काम लड़कियों स्टूडेंट्स के लिए कुछ चुनौतियां खड़ी करते हैं, ऐसे में हमारी योजना के जरिए, हर जिले में एक लड़कियों का हॉस्टल बनाया जाएगा ताकि इमर्सिव अनुभवों के जरिए एस्ट्रोफिजिक्स और एस्ट्रोनॉमी को बढ़ावा दिया जा सके।

 लखपति दीदी कार्यक्रम का होगा विस्तार 

सीतारमण ने कहा कि बजट में लखपति दीदी कार्यक्रम की सफलता को आगे बढ़ाया गया है। इसके तहत सरकार महिलाओं को क्रेडिट-लिंक्ड आजीविका से एंटरप्राइज मालिक बनने में मदद करने की योजना बना रही है। साथ ही क्लस्टर-लेवल फेडरेशन के भीतर कम्युनिटी-ओन्ड रिटेल आउटलेट के तौर पर सेल्फ-हेल्प एंटरप्रेन्योर मार्ट स्थापित किए जाएंगे, इन मार्ट को बेहतर और इनोवेटिव फाइनेंसिंग के ज़रिए सपोर्ट किया जाएगा, इससे महिलाएं एंटरप्रेन्योरशिप में अगला कदम उठा सकेंगी।

 सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का प्रस्ताव 

केंद्रीय बजट में प्रमुख शहरी और आर्थिक केंद्रों में सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने के प्रस्ताव दिया गया।  बजट में मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु,

हैदराबाद-चेन्नई, वाराणसी-सिलीगुड़ी चेन्नई-बेंगलुरु और 

दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करने ऐलान किया गया। साथ ही पर्यावरण के अनुकूल यात्री परिवहन को बढ़ावा देने की बात कही गई है, ये कॉरिडोर ग्रोथ कनेक्टर के रूप में काम करेंगे, यात्रा का समय कम करेंगे, प्रदूषण कम करेंगे और क्षेत्रीय विकास में मदद करेंगे।

 कैंसर और डायबिटीज की दवाएं होंगी सस्ती


सीतारमण ने बजट भाषण में देश में बायो फार्मा सेक्टर के विकास से देश में कैंसर, डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों की दवाइयां सस्ती करने का ऐलान किया। सीतारमण ने घोषणा की कि 17 जरूरी दवाओं के आयात पर छूट (इंपोर्ट ड्यूटी में राहत) दी जाएगी, इस कदम से इन दवाओं की कीमतें कम होंगी और मरीजों को सीधा फायदा मिलेगा। इस फैसले का सबसे बड़ा फायदा कैंसर और डायबिटीज के मरीजों को मिलेगा, इसके अलावा कुछ दुर्लभ और गंभीर बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली एडवांस दवाएं भी इस लिस्ट में शामिल हैं, ये वे दवाएं हैं जिनका देश में सीमित उत्पादन होता है या जो पूरी तरह आयात पर निर्भर हैं। सीतारमण ने 10,000 करोड़ रुपये का एक एसएमई ग्रोथ फंड की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार ने भविष्य में नौकरियां पैदा करने और चुनिंदा मानदंडों के आधार पर उद्यमों को प्रोत्साहित करने के लिए एक डेडिकेटेड 10,000 करोड़ रुपये का एसएमई ग्रोथ फंड शुरू करने का प्रस्ताव दिया है। 

 डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर बनाएगी सरकार 

सीतारमण ने भारत के लिए डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर की घोषणा की। उन्होंने कहा कि नवंबर 2025 में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के लिए एक योजना शुरू की गई थी, अब हम ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे खनिज समृद्ध राज्यों को डेडिकेटेड रेयर अर्थ कॉरिडोर स्थापित करने में मदद करने का प्रस्ताव देते हैं। इसका मकसद भारत के घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बेस को मजबूत करना और ज़रूरी मिनरल्स के इंपोर्ट पर निर्भरता को कम करना है, अब दुर्लभ खनिज के क्षेत्र में भारत भी दुनिया से कदम से कदम मिलाकर चलेगा। केंद्र सरकार उन राज्यों को समर्थन देगी जहां रेयर अर्थ मेटल मौजूद हैं। वित्त मंत्री के अनुसार, इस स्कीम के तहत रेयर अर्थ मिनरल्स की माइनिंग, प्रोसेसिंग, रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जाएगा, चीन के पास दुनिया का सबसे बड़ा रेयर अर्थ भंडार है, ऐसे में इस कदम से चीन की दादागिरी खत्म होगी।

 खादी और हस्तशिल्प टेक्सटाइल होंगे मजबूत 

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण में खादी और हस्तशिल्प टेक्सटाइल को मजबूत करने के लिए योजना का प्रस्ताव दिया। उन्होंने बजट में टेक्सटाइल लेबर इंसेंटिव स्कीम और नेशनल हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट्स प्रोग्राम की घोषणा की, वही चैलेंज मोड में मेगा टेक्सटाइल पार्क स्थापित करने का प्रस्ताव है। उन्होंने कहा कि खादी और हस्तशिल्प टेक्सटाइल को मजबूत करने के लिए योजना बनाई है, इसके तहत महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल शुरू की जाएगी, जो विशेष रूप से खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प क्षेत्रों के पुनरुद्धार पर केंद्रित है। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ाने, ब्रांडिंग करने और वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए काम करेगी। वहीं 'टेक्सटाइल एक्सपेंशन एंड एम्प्लॉयमेंट स्कीम' के तहत पारंपरिक क्लस्टर्स को आधुनिक मशीनों, तकनीक और साझा परीक्षण केंद्रों से सुसज्जित किया जा रहा है। जबकि समर्थ 2.0 वस्त्र क्षेत्र में कौशल विकास के लिए 'समर्थ' योजना का उन्नत संस्करण पेश किया गया है, जो कारीगरों को आधुनिक तकनीक के अनुसार अपस्किलिंग और रीस्किलिंग प्रदान करेगा।

 शहरों में नए इकनॉमिक जोन बनेंगे 

शहरों को विकास के इंजन के रूप में विकसित करने, स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने और घरेलू विनिर्माण को गति देने के लिए बजट में शहरों में नए इकनॉमिक जोन बनाने की घोषणा की गई। वहीं देश के विभिन्न राज्यों में 12 नए औद्योगिक शहर स्थापित किए जाएंगे, जो ग्रेटर नोएडा (यूपी) और धोलेरा (गुजरात) की तर्ज पर विकसित होंगे। इनमें से कुछ आंध्र प्रदेश और बिहार में आ रहे हैं।  वहीं क्षेत्रीय विकास योजना में एक मिलियन से अधिक आबादी वाले शहरों को 20-वर्षीय 'सिटी स्पेटियल एंड इकनॉमिक प्लान' तैयार करना होगा, जो हर पांच साल में अपडेट किया जाएगा।

 किसानों को एआई की मिलेगी नई ताकत  

कृषि क्षेत्र को मजबूती देने के लिए केंद्र सरकार ने इस बार बजट में धुरंधर खेत खलिहान की सोच पर बड़ा दांव लगाया है। बहु भाषीय एआई टूल किसानों की उत्पादकता को बढ़ाएगा और विशिष्ट सलाह प्रदान करके किसानों को बेहतर निर्णय लेने और जोखिम को कम करने में मदद करेगा। सीतारमण ने घोषणा करते हुए साफ संकेत दिया कि चाहे तटवर्ती काजू नारियल किसान हों, पहाड़ी इलाकों के खुमानी अखरोट बादाम उत्पादक हों या औषधीय खेती करने वाले किसान, हर वर्ग के लिए लक्षित योजनाएं तैयार की गई हैं.

बजट के अनुसार, भारत अब अपनी विशेष फसलों को वैश्विक बाज़ार में प्रीमियम ब्रांड के रूप में स्थापित करने पर काम करेगा, भारतीय काजू को ‘प्रीमियम ब्रांड' के रूप में स्थापित किया जाएगा, जिससे एक्सपोर्ट बढ़ेगा, पहाड़ी इलाकों में खुमानी, अखरोट और बादाम की खेती को बढ़ावा दिया जाएगा, इन फसलों के लिए खास प्रोत्साहन योजनाएं लागू होंगी, ताकि कठिन भूगोल में भी किसान अधिक कमाई कर सकें, चंदन की खेती के लिए राज्यों और किसानों को विशेष सहायता, ताकि यह महंगी और मांग वाली फसल फिर से भारत की पहचान बन सके, वहीं उच्च गुणवत्ता वाले आयुर्वेदिक उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने की रणनीति बनाई गई है, इससे जड़ी-बूटी उगाने वाले किसानों की कमाई सीधे बढ़ेगी, क्योंकि निर्यात बाजार में इनकी मांग लगातार बढ़ रही है। 

 पांच नई यूनिवर्सिटी टाउनशिप्स का निर्माण 

बजट में राज्यों की मदद करने का ऐलान किया है ताकि चुनौती आधारित योजना के तहत पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप्स बनाई जा सकें। ये टाउनशिप्स बड़े औद्योगिक और लॉजिस्टिक कॉरिडोर के पास होंगी, इन जोन में कई यूनिवर्सिटी, कॉलेज, रिसर्च इंस्टीट्यूट, स्किल सेंटर और रहने के लिए कॉम्प्लेक्स तैयार किए जाएंगे, इससे छात्रों को आधुनिक शिक्षा और रोजगार की बेहतर संभावनाएं मिलेंगी। बजट में ऐलान किया गया है कि एस्ट्रोफिजिक्स और एस्ट्रोनॉमी के क्षेत्र में छात्रों को इमर्सिव यानी अनुभव आधारित सीखने के मौके मिलें, इसके लिए चार टेलीस्कोप और प्लेनेटेरियम सुविधाओं को नया बनाया जाएगा या अपग्रेड किया जाएगा। इनमें शामिल हैं नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप, नेशनल लार्ज ऑप्टिकल इन्फ्रारेड टेलीस्कोप, हिमालयन चंद्रा टेलीस्कोप और कॉसमॉस- 2 प्लेनेटेरियम इन पहलों से न सिर्फ शोधकर्ताओं और छात्रों को मदद मिलेगी, बल्कि भारत वैज्ञानिक और तकनीकी उन्नति के रास्ते पर भी मजबूती से आगे बढ़ेगा।

 

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