ब्रिक्स नौसैनिक अभ्यास में हिस्सा नहीं लेने पर स्पष्टीकरण : भारत इसमें शामिल नहीं, रणधीर जायसवाल ने कहा- यह ब्रिक्स की संस्थागत गतिविधि नहीं
नियमित समुद्री अभ्यास में भाग लेता है
यह न तो कोई नियमित था और न ही कोई संस्थागत ब्रिक्स गतिविधि थी और न ही सभी ब्रिक्स सदस्य देशों ने इसमें भाग लिया। भारत ने अतीत में भी ऐसे किसी अभ्यास में भाग नहीं लिया है।
नई दिल्ली। तथाकथित 'ब्रिक्स नौसैनिक अभ्यास' में हिस्सा नहीं लेने की रिपोर्टो पर भारत ने स्पष्ट किया कि वह इसमें इसलिए शामिल नहीं हुआ, क्योंकि यह पूरी तरह से दक्षिण अफ्रीका की एक पहल है और ब्रिक्स की संस्थागत गतिविधि का हिस्सा नहीं है। विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भारत की तथाकथित 'ब्रिक्स नौसैनिक अभ्यास' में भागीदारी नहीं होने के बारे में मीडिया में पूछे गए प्रश्नों के जवाब में कहा कि जिस अभ्यास का उल्लेख किया जा रहा है, वह पूरी तरह से दक्षिण अफ्रीका की एक पहल थी, जिसमें कुछ ब्रिक्स सदस्य देशों ने भाग लिया। यह न तो कोई नियमित था और न ही कोई संस्थागत ब्रिक्स गतिविधि थी और न ही सभी ब्रिक्स सदस्य देशों ने इसमें भाग लिया। भारत ने अतीत में भी ऐसे किसी अभ्यास में भाग नहीं लिया है।
उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में भारत जिस नियमित समुद्री अभ्यास में भाग लेता है, वह आईबीएसएएमएआर है, जिसमें भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका की नौसेनाएं शामिल होती हैं। आईबीएसएएमएआर का पिछला संस्करण अक्टूबर 2024 में आयोजित किया गया था। उल्लेखनीय है कि चीन, दक्षिण अफ्रीका , रूस संयुक्त अरब अमीरात और ईरान की नौसेनाएं केप टाऊन के तट पर अभ्यास कर रही हैं। यह अभ्यास दक्षिण अफ्रीका की पहल पर हो रहा है। भारत और ब्राजील इस अभ्यास में हिस्सा नहीं ले रहे है। वहीं अमेरिका ने ईरान पर भी अभ्यास से पीछे हटने का दबाव बनाया हुआ है।

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