कचरा संग्रह शुल्क के बहाने लोगों की जेब काटेगी हरियाणा सरकार : सैलजा ने की शुल्क वसूलने के फरमान की आलोचना, कहा- सरकार का जनता को यह तीसरा झटका
पहले टोल टैक्स बढ़ाकर वाहन चालकों की कमर तोड़ डाली
सैनी सरकार ने इस बारे में प्रदेश की सभी नगर पालिका, नगर परिषद और नगर निगमों को पत्र लिखा है और कचरा संग्रह शुल्क की वसूली वित्त वर्ष 2025-26 से होगी।
चंडीगढ़। कांग्रेस महासचिव एवं सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने हरियाणा सरकार के कचरा संग्रह शुल्क वसूलने के फरमान की आलोचना करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार जनता को कोई राहत प्रदान करने के बजाय लगातार लोगों की जेब काटने में लगी हुई है। उन्होंने यहाँ जारी बयान में कहा कि नायब सिंह सैनी सरकार ने इस बारे में प्रदेश की सभी नगर पालिका, नगर परिषद और नगर निगमों को पत्र लिखा है और कचरा संग्रह शुल्क की वसूली वित्त वर्ष 2025-26 से होगी।
उन्होंने कहा कि डेढ़ साल पहले सरकार ने संभवत: चुनावों के मद्देनजर यह शुल्क बंद किया था, लेकिन अब फिर से शुरू करने जा रही है। उन्होंने कहा कि अप्रैल माह नवरात्र में सरकार का जनता को यह तीसरा झटका है। पहले टोल टैक्स बढ़ाकर वाहन चालकों की कमर तोड़ डाली, फिर बिजली की दरों में वृद्धि की। उन्होंने कहा कि शुल्क 60 रुपये से लेकर 60 हजार रुपये तक रखा गया है। यह शुल्क प्रॉपर्टी टैक्स के साथ जुड़कर आएगा। रिहायशी मकानों पर सरकार की ओर से 60 रुपये से 1200 रुपये वार्षिक शुल्क रखा गया है। शैक्षणिक संस्थाओं पर 12 हजार से 24 हजार रुपये वार्षिक जबकि सरकारी कार्यालय और संस्थाओं पर 1800 रुपये वार्षिक शुल्क रखा गया है। दुकानों और अस्पतालों से क्षेत्रफल के अनुसार 300 रुपये से 60 हजार रुपये तक वार्षिक शुल्क रखा गया है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि सरकार का यह फैसला पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। प्रदेश के शहरों में सफाई व्यवस्था पहले से ही लचर है, जिन शहरों को स्मार्ट सिटी बनाने में अरबों रुपये खर्च किए गए थे, वहां आज भी नरक जैसे हालात है, शहरों में जगह-जगह कूड़े के ढेर लगे हुए हैं, बावजूद इसके शुल्क लगाना तानाशाही रवैया कहा जा सकता है। उन्होंने मांग की कि पहले से महंगाई की मार झेल रही जनता को राहत प्रदान के लिए सरकार को इस फैसले को वापस लेना चाहिए।
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