बजट सत्र में कायम हुए रिकॉर्ड : कभी किसी विधेयक पर इतनी लंबी नहीं हुई चर्चा, रिजीजू ने कहा- राज्यसभा और लोकसभा में सरकार को अपेक्षा के अनुरूप ही मिले वोट

अपने सांसदों को व्हिप जारी नहीं किया था

बजट सत्र में कायम हुए रिकॉर्ड : कभी किसी विधेयक पर इतनी लंबी नहीं हुई चर्चा, रिजीजू ने कहा- राज्यसभा और लोकसभा में सरकार को अपेक्षा के अनुरूप ही मिले वोट

इसके लिए वह सभी सांसदों एवं राजनीतिक दलों को धन्यवाद देते हैं। उन्होंने कहा कि राज्यसभा और लोकसभा में सरकार को अपेक्षा के अनुरूप ही वोट मिले हैं।

नई दिल्ली। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजीजू ने संसद के समाप्त हुए बजट सत्र में वक्फ (संशोधन) विधेयक पर दोनों सदनों में रिकॉर्ड समय तक हुई चर्चा को ऐतिहासिक बताया और इसमें बिना स्थगन या हंगामा किये भाग लेने के लिए सभी राजनीतिक दलों के सांसदों को धन्यवाद दिया। रिजीजू ने संसद भवन परिसर में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि वक्फ (संशोधन) विधेयक में लोकसभा में 14 घंटे से अधिक और राज्यसभा में लगभग 17 घंटे तक चर्चा हुई। लोकसभा में तीन अप्रैल को तड़के तीन बजे तक और राज्यसभा में आज सुबह चार बजे तक कार्यवाही चली और इसमें कोई बाधा या स्थगन नहीं हुआ। इस प्रकार से एक रिकॉर्ड कायम हुआ है। इससे पहले कभी किसी विधेयक पर इतनी लंबी चर्चा नहीं हुई है। 

उन्होंने कहा कि इसके लिए वह सभी सांसदों एवं राजनीतिक दलों को धन्यवाद देते हैं। उन्होंने कहा कि राज्यसभा और लोकसभा में सरकार को अपेक्षा के अनुरूप ही वोट मिले हैं। राज्यसभा में एक दल ने अपने सांसदों को व्हिप जारी नहीं किया था और अंतरात्मा की आवाज पर वोट देने की छूट दी थी, जिस पर उसके सांसदों ने सरकार के पक्ष का समर्थन किया। यदि कांग्रेस एवं अन्य विपक्षी दलों ने व्हिप जारी नहीं किया होता, तो सरकार को ज्यादा समर्थन मिलता। उन्होंने दावा किया कि कई विपक्षी दलों के सदस्यों ने निजी तौर पर कहा है कि व्हिप का बंधन नहीं होता, तो वे विधेयक का समर्थन करते। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के बयान को लेकर पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वह गांधी का व्यक्तिगत रूप से सम्मान करते हैं, लेकिन कांग्रेस के वक्तव्य में जबरदस्ती बुलडोज करके विधेयक पारित कराने की बात गलत है। सबने देखा है कि दोनों सदनों ने लंबी बहस की और सब संशोधन प्रस्तावों एवं मतदान के जरिये इसे नियमानुसार पारित किया गया है। इसलिए बुलडोज शब्द का इस्तेमाल अनुचित है।

रिजीजू ने कहा कि संसद का बजट सत्र, 2025, जो 31 जनवरी 2025 में शुरू हुआ था, चार अप्रैल, 2025 को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया गया है। इस बीच दोनों सदन गुरुवार 13 फरवरी को मध्यावकाश के लिये स्थगित कर दिए जाने के बाद सोमवार 10 मार्च को पुन: समवेत हुए थे ताकि विभाग संबंधी स्थायी समितियां विभिन्न मंत्रालयों/विभागों से संबंधित अनुतन मांगों की जांच कर सकें और उन पर अपनी रिपोर्ट दे सकें। बजट सत्र के पहले आग के दौरान लोक सभा और राज्य सभा दोनों की कुल नौ बैठकें हुई थी। सत्र के दूसरे भाग में दोनों सदनों की 17 बैठकें हुई। पूरे बजट सत्र के दौरान कुल 26 बैठकें हुईं।

रिजीजू ने कहा कि इस सत्र के दौरान, कुल 11 विधेयक (लोक सभा में 10 और राज्य सभा में 1) पुर:स्थापित किए गये। सोलह विधेयक लोक सभा द्वारा पारित किए गए और 14 विधेयक राज्य सभा द्वारा पारित किए लौटाए गए। संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित/लौटाए गए विधेयकों की कुल संख्या 16 है। बजट सत्र, 2025 के दौरान लोक सभा की उत्पादकता लगभग 118 प्रतिशत और राज्य सभा की उत्पादकता लगभग 119 प्रतिशत रही।
उन्होंने कहा कि यह वर्ष का पहला सत्र होने के नाते, राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 87(1) के अनुसार 31 जनवरी, को संसद के दोनों सदनों की समवेत बैठक को संबोधित किया था। लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव श्री रामवीर ङ्क्षसह बिधूडी ने पेश किया था और  रविशंकर प्रसाद ने इसका समर्थन किया था। इस मद पर लोकसभा में 12 घंटे के आबंटित समय के मुकाबले 17 घंटे 23 मिनट तक चर्चा हुई।

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चर्चा में 173 सदस्यों ने भाग लिया था। राज्यसभा में इसे श्रीमती किरण चौधरी ने पेश किया और श्री नीरज शेखर ने इसका समर्थन किया था। इस मद पर राज्यसभा में 15 घंटे के आवंटित समय के मुकाबले 21 घंटे 46 मिनट तक चर्चा की गयी। चर्चा में 73 सदस्यों ने भाग लिया था। सत्र के पहले भाग के दौरान दोनों सदनों में राष्ट्रपति के अभिभाषण संबंधी धन्यवाद प्रस्तावों पर चर्चा की गयी और प्रधानमंत्री के उत्तर के बाद उन्हें स्वीकृत किया गया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025-26 के लिए केंद्रीय बजट शनिवार, 01 फरवरी को पेश किया गया। सत्र के पहले आग के दौरान दोनों सदनों में केंद्रीय बजट पर सामान्य चर्चा हुई। इस पर लोक सभा में 12 घंटे के आवंटित समय के मुकाबले 16 घंटे 13 मिनट तक चर्चा हुई और 169 सदस्यों ने चर्चा में आग लिया तथा राज्य सभा इस पर 15 घंटे के आबंटित समय के मुकाबले 17 घंटे 56 मिनट चर्चा हुई और चर्चा में 89 सदस्यों ने भाग लिया। सत्र के दूसरे भाग के दौरान लोक सभा में रेल, जल शक्ति और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालयों की अनुदान मांगों पर चर्चा और मतदान किया गया। अंत में शेष मंत्रालयों/विभागों की अनुदान मांगों को 21 मार्च को सदन में मतदान के लिए रखा गया। संबंधित विनियोग विधेयक भी 21 मार्च को ही लोक सभा में पुर:स्थापित, विचार और पारित कर दिया गया।

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केंद्र के संबंध में वर्ष 2024-25 के लिए अनुपूरक अनुदान मांगों के दूसरे और अंतिम बैच: वर्ष 2021-22 के लिए अतिरिक्त अनुदान मांगों और मणिपुर राज्य के संबंध में वर्ष 2024-25 के लिए अनुपूरक अनुदान मांगों तथा वर्ष 2025-26 के लिए लेखानुदान मांगों से संबंधित विनियोग विधेयकों को भी 11 मार्च को लोक सभा में पारित किया गया। वित्त विधेयक, 2025 लोक सभा द्वारा 25 मार्च को पारित किया गया। राज्यसभा में शिक्षा, रेल, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा गृह मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा की गई। राज्यसभा ने केन्द्र के संबंध में वर्ष 2024-25 अनुपूरक अनुदान मांगों के दूसरे और अंतिम बैच, वर्ष 2021-22 के लिए अतिरिक्त अनुदान मांगों और मणिपुर राज्य के संबंध में वर्ष 2024-25 के लिए अनुपूरक अनुदान मांगों तथा वर्ष 2025-26 के लिए मांगों से संबंधित विनियोग विधेयक को 18 मार्च को लौटा दिया। वर्ष 2025-20 के लिए केंद्र की अनुदान मांगों से संबंधित विनियोग विधेयक और वित्त विधेयक, 2025 को राज्य सभा द्वारा भी 27 मार्च को लौटा दिया गया। इस प्रकार संसद के सभी में संपूर्ण वितीर्थ 31 मार्च से पहले पूरा कर लिया गया।

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रिजीजू ने कहा कि मणिपुर राज्य के संबंध में संविधान के अनुच्छेद 356 (1) के अंतर्गत राष्ट्रपति ट््वारा 13 फरवरी, 2025 को जारी की गयी, उद्घोषणा का अनुमोदन करने वाले सांविधिक संकल्प को भी दोनों सदनी में क्रमश: 3 और 4 अप्रैल, को स्वीकृत किया गया। संयुक्त समिति की रिपोर्ट प्रस्तुत किए जाने के बाद, वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पारित किया गया, जिसका उद्देश्य वक्फ संपतियों के प्रबंधन में सुधार, वक्फ संपतियों के प्रबंधन से संबंधित हितधारकों के सशक्तिकरण, सर्वेक्षण, पंजीकरण और मामले के निपटान की प्रक्रिया में दक्षता में सुधार और वक्फ संपत्तियों के विकास पर ध्यान केंद्रित करना है। जबकि मुख्य उद्देश्य वक्फ संपतियों का प्रबंधन करना है, इसका उद्देश्य बेहतर प्रशासन के लिए आधुनिक और वैज्ञानिक तरीके लागू करना है। मुसलमान वक्फ अधिनियम, 1923 को भी निरस्त कर दिया गया।

संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि आपदा प्रबंधन (संशोधन) विधेयक, 2025, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के कुशल कामकाज को मजबूत करने के लिए आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में काम करने वाले विभिन्न संगठनों की भूमिकाओं में अधिक स्पष्टता और अभिसरण लाने की मांग करता है, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों को राष्ट्रीय स्तर और राज्य स्तर पर आपदा योजना तैयार करने के लिए सशक्त बनाता है, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर आपदा डेटाबेस बनाने का प्रावधान करता है, राज्य की राजधानी और नगर निगम वाले बड़े शहरों के लिए'शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के गठन का प्रावधान करता है और राज्य सरकार द्वारा Þराज्य आपदा प्रतिक्रिया बल के गठन का प्रावधान करता है।

त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय विधेयक, 2025 भी पारित किया गया जो त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय की स्थापना से संबंधित है, जो सहकारिता के क्षेत्र में शिक्षा, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण उपलब्ध कराएगा और संबंधित क्षेत्रों में अनुसंधान और विकास गतिविधियों संचालित करेगा। यह डिग्री कार्यक्रम, दूरस्थ शिक्षा और ई-लर्निंग पाठ्यक्रम उपलब्ध कराएगा और सहकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्टता के केंद्र विकसित करेगा। भारत में प्रवेश करने और भारत से बाहर जाने वाले व्यक्तियों के संबंध में पासपोर्ट या अन्य यात्रा दस्तावेजों की आवश्यकता के लिए कानूनी को सरल बनाने और वीजा और पंजीकरण की आवश्यकता सहित विदेशियों से संबंधित मामलों को विनियमित करने के लिए आप्रवास और विदेशियों विषयक विधेयक, 2025 पारित किया गया है। बैंककारी विधियां (संशोधन) विधेयक, 2025 भी पारित किया गया ताकि शासन मानकों में सुधार हो, बैंकों द्वारा भारतीय रिजर्व बैंक  को रिपोर्टिंग में स्थिरता प्रदान की जा सके, जमाकर्ताओं और निवेशकों के लिए बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में लेखा परीक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो और नामांकन आदि के संबंध में ग्राहकों को सुविधा प्रदान की जा सके।

Tags: budget

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