टीकाराम जूली का राठौड़ पर पलटवार, शायराना अंदाज में लगाए आरोप
बात निकलेगी, तो फिर दूर तलक जाएगी
राइजिंग राजस्थान को लेकर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ में वार पलटवार जारी है।
जयपुर। राइजिंग राजस्थान को लेकर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ में वार पलटवार जारी है। राठौड़ के बयानों पर जूली ने शायराना अंदाज में पलटवार करते हुए आरोप लगाए। जूली ने कहा कि बात निकलेगी, तो फिर दूर तलक जाएगी। लोग बे-वजह उदासी का सबब पूछेंगे। ये भी पूछेंगे कि आप इतने परेशाँ क्यूँ हो। जगमगाते हुए लम्हों से गुरेज़ाँ क्यूँ हो। राठौड़ साहब, आपने जो प्रशंसा की उसके लिए आपका आभार। कांग्रेस और भाजपा में यही अंतर है कि हम अध्ययन कर ही आंकड़े बोलते हैं और भाजपा के साथी हवा में ही 35 लाख करोड़ रुपये बोल जाते हैं जो राज्य की जीएसडीपी से भी दोगुना है। खैर, ऐसा लगता है कि आप आंकड़ों के जाल में उलझाकर भाजपा सरकार की नाकामी जनता के सामने रखना चाहते हैं।
भाजपा द्वारा आपके साथ किए जाए रहे उपेक्षापूर्ण व्यवहार के बाद यह उचित भी है। आप कर्ज और राजकोषीय घाटे को एफआरबीएम एवं जीएसडीपी की अनुमत सीमा में बताकर भ्रमित कर रहे हैं पर यह छिपा रहे हैं कि भाजपा सरकार द्वारा तय किए गए लक्ष्यों से यह अधिक है यानी भाजपा सरकार का वित्तीय प्रबंधन फेल साबित हो रहा है। आप जीएसडीपी के आंकड़ों की तुलना पिछली सरकार से करना चाहते हैं तो फिर 2013-18 की भाजपा सरकार (जिसमें आप भी मंत्री थे) की तुलना 2018-23 की हमारी सरकार से भी कीजिए। 2018-19 में प्रदेश का बजट साइज 2 लाख 12 हजार 275 करोड़ रुपये था जिसमें हमारी सरकार ने 84 प्रतिशत बढ़ोत्तरी कर 2023-24 में 3 लाख 90 हजार 856 करोड़ रुपये तक पहुंचाया। 2018-19 में जीएसडीपी का आकार 9 लाख 11 हजार 519 करोड़ रुपये था जो 2023-24 में 70 प्रतिशत बढ़ोत्तरी के साथ 15,28,385 हो गया था। 2018-19 में राज्य की आर्थिक विकास दर केवल 2.37 प्रतिशत थी, जो 2021-22 में देश में दूसरी सबसे अधिक यानी 11.04 प्रतिशत पहुंच गई थी। 2017-18 में राजस्थान प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोत्तरी के मामले में 30वें स्थान पर था और प्रति व्यक्ति आय केवल 98,698 रु थी, जो 2023-24 में बढ़कर 1 लाख 57 हजार रु हो गई और यह बढ़ोत्तरी वाले राज्यों में नवां स्थान था।अगर कर्ज की विरासत की भी बात करें तो 2013-14 में जीएसडीपी का केवल 23.58 प्रतिशत यानी 1 लाख 29 हजार 910 करोड़ रु कर्ज था, लेकिन 2018-19 में आपकी सरकार के दौरान ये बढ़कर जीएसडीपी का 34.16 प्रतिशत यानी 3 लाख 11 हजार 373 करोड़ रु हो गया यानी राज्य पर लगभग दो गुने से अधिक कर्ज आपकी सरकार में चढ़ गया।
आपके पूंजीगत व्यय के आंकड़े भी ठीक नहीं हैं। 2023-24 के बजट अनुमान में 38,061 करोड़ रु के पूंजीगत व्यय का अनुमान रखा गया। दो महीने आचार संहिता और तीन महीने आपकी सरकार के बावजूद रिवाइज एस्टिमेट में 34,844 करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय पर खर्च हुए। 2024-25 के लिए प्रस्तावित किए गए 44,000 करोड़ में से आप 6,000 करोड़ यानी 13 प्रतिशत राशि खर्च ही नहीं कर पाए, ये आपकी सच्चाई है। वैसे, अब आप ये बताइए कि प्रधानमंत्री ने राजस्थान में भाजपा सरकार बनते ही पड़ोसी राज्यों जैसे हरियाणा और गुजरात की बराबर पेट्रोल और डीजल के दाम करने का वादा किया था। वह वादा कब पूरा होगा क्योंकि सरकार बने अब डेढ़ साल होने जा रहा है।
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