पूर्वोत्तर भारत में भी सक्रिय होने की तैयारी में सपा : असम चुनाव में उतरने की रणनीति पर कर रही काम, अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में उम्मीदवार उतार सकती है पार्टी; अखिलेश यादव करेंगे चुनाव-प्रचार
अखिलेश यादव के नेतृत्व में राष्ट्रीय पार्टी बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे
समाजवादी पार्टी अब उत्तर प्रदेश से बाहर विस्तार की रणनीति पर काम कर रही है। सपा असम विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में है और इसे राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत होने की कोशिश माना जा रहा है। अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों पर फोकस की संभावना है। अखिलेश यादव भी प्रचार के लिए जा सकते हैं। सपा का लक्ष्य राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल करना है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाने के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) अब अपने दायरे को बढ़ाते हुए पूर्वोत्तर भारत में भी सक्रिय होने की तैयारी कर रही है। पार्टी असम विधानसभा चुनावों में उतरने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार असम इकाई के नेताओं ने हाल ही में लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात कर आगामी चुनावों और संगठन विस्तार पर चर्चा की। पार्टी के सूत्रों के मुताबिक, पूर्वोत्तर में अपनी मौजूदगी बढ़ाने के उद्देश्य से असम में चुनाव लड़ने को एक दीर्घकालिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। सपा की योजना अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारने की हो सकती है। उम्मीदवारों की घोषणा के बाद अखिलेश यादव के भी चुनाव प्रचार के लिए असम जाने की संभावना जताई जा रही है।
इससे पहले सपा 2011 और 2016 के असम विधानसभा चुनाव भी लड़ चुकी है, लेकिन उसे किसी भी सीट पर सफलता नहीं मिली थी। इसके बावजूद पार्टी नेतृत्व का मानना है कि गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में संगठन खड़ा करना भविष्य की राजनीति के लिए जरूरी है। पार्टी के एक पूर्व मंत्री ने कहा कि असम चुनावों में उम्मीदवार उतारने को लेकर अंतिम निर्णय राष्ट्रीय अध्यक्ष ही करेंगे। उन्होंने कहा, Þकिसी भी राजनीतिक दल को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा पाने के लिए चार राज्यों में कम से कम 6 प्रतिशत वोट हासिल करना जरूरी होता है। आम आदमी पार्टी ने चार राज्यों में यह मानदंड पूरा कर राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल किया है। हमारा मतदाता आधार बड़ा है और हम लोकसभा में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी हैं, लेकिन अभी तक हमें राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा नहीं मिला है।
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी (सपा) का संगठन कई राज्यों में मौजूद है और पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में उसे राष्ट्रीय पार्टी बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पार्टी ने 2004 के लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार की बड़ी कोशिश करते हुए 237 उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। उस चुनाव में पार्टी ने 36 सीटें जीती थीं, जिनमें 35 सीटें उत्तर प्रदेश और एक सीट उत्तराखंड से थीं। इसके विपरीत 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने केवल 49 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने 37 सीटें जीतीं और ये सभी सीटें उत्तर प्रदेश से थीं। इसके साथ ही पार्टी लोकसभा में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। दरअसल, किसी भी दल को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा तब मिलता है, जब वह निम्न में से किसी एक शर्त को पूरा करे जिसमे कम से कम तीन अलग-अलग राज्यों से लोकसभा की कुल सीटों का 2 प्रतिशत जीतना, लोकसभा या विधानसभा चुनाव में चार या उससे अधिक राज्यों में कुल वैध मतों का कम से कम 6 प्रतिशत प्राप्त करना या कम से कम चार राज्यों में राज्य स्तरीय दल के रूप में मान्यता प्राप्त करना अनिवार्य है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असम में चुनाव लडऩे की तैयारी सपा की उसी रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह उत्तर प्रदेश से बाहर अपने संगठन और वोट आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और घोसी के सांसद राजीव राय ने कहा कि पार्टी मुखिया अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी का लगातार विस्तार हो रहा है। असम के अलावा भी कई राज्यों में पार्टी का ढांचा मजबूत करने पर काम चल रहा है। जहां तक असम चुनाव का सवाल है तो पार्टी पहले भी वहाँ चुनाव लड़ चुकी है। आगे भी पार्टी वहां मजबूती से चुनाव लड़ेगी। इसकी तैयारी चल रही है।

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