यह तो सरासर लापरवाही है, 5 दिनों से टूटी पड़ी नहर की दीवार
मुख्य नहर की दीवार गिरने से सड़क का रास्ता जानलेवा
प्रशासनिक स्तर की लापरवाही के मुद्दे पर स्थानीय लोगों में चिंता और नाराजगी।
कोटा । सरकारी तंत्र के हाकमों को आम जनता की जान की कितनी फिक्र होती है, इसका ताजा उदाहरण नान्ता रोड़ पर नहर की टूटी दीवारों को देखने से मिल जायेगा। दरअसल सोमवार रात को चम्बल की बायीं मुख्य नहर की दीवार गिरने से सड़क का रास्ता पुरी तरह जानलेवा हो गया था। मामले में प्रशासनिक तंत्र की गंभीर लापरवाही व संवेदनहीनता सामने आई है। यहां पर आम वाहन चालकों की सुरक्षा के लिये कोई ठोस वयवस्था अभी तक नही की गयी है। घटना की रात ही सूचना मौके से ही पुलिस कन्ट्रोल रूम व स्थानीय थाने व सीएडी प्रशासन को दी गयी थी । देर रात मौके पर हमारे प्रतिनिधी द्वारा एक घंटे रुकने के बाद क्षेत्र के जवानों ने दो अस्थायी बैरिकेट़स लगाये और अगले दिन दीवार के पास सुरक्षित क्षेत्र बनाने का आश्वासन दिया।
युवक ने कहा अब किसी और को नहीं गिरने दूंगा
उस रात हादसे में बाल बाल बचे युवक ने कहा मै यहां चापाई लगा कर बैठूंगा पर किसी को इस नहर मे नही गिरने दूंगा सोमवार की रात जानलेवा हादसे का शिकार होने बचे व्यक्ति ने बताय कि अब जब भी यहा से गुजरता हु तो डर लगता है। मेरी अपील है कि प्रशासन ठीक करवाये या फिर मुझे कहदे मै कम से कम रात के समय तो यहाँ चारपाई लगा कर बैठ ही सकता हूँ। आखिर हमें तो फिक्र करनी ही होगी।
खतरा ज्यों का त्यों
तीन दिन बीत जाने के बाद भी दीवार केआसपास स्थायी सुरक्षा उपाय नहीं किए गए। सीएडी अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से मुंह फेरते दिखे। अगले दिन मामले की सूचना एसएचओ कौशल्या गालव को भी दी गई, जिन्होंने सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही, लेकिन शुक्रवार रात तक मौके पर सीएडी के जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई ठोस कदम उठाया। हालांकि गुरूवार को दिवार के खुले हिस्से पर झाड़ियां जरूर लगा दी ।
बोले थे मिट्टी के कट्टे लगवा रहे
5 दिन से खुला पड़ा मौत का मुहाना स्थानीय लोगों ने अधिकारियों से संपर्क किया, जिनका कहना था कि जल्दी मिट्टी और कट्टे डालकर व्यवस्था कर दी जाएगी। हालांकि दो दिन गुजर जाने के बाद भी सुरक्षा के पुरे इंतजाम नहीं किया गया। इस प्रशासनिक अनदेखी से स्थानीय लोगों में रोष व्याप्त है। राहगीर और पड़ोसी भी प्रशासन की गंभीर लापरवाही पर ताना मारते हुए गुजरते हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि सरकारी सिस्टम में त्वरित कार्रवाई और जवाबदेही की कमी ने लोगों की सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल दिया है।
गुरुवार को ही हमने कांटे लगवाएं हैं। स्थाई रूप से इंतजाम नहीं कर सकते। लोगों को कोई नुकसान ना हो इसके लिए कार्रवाई करेंगे। अभी वापस से पानी की डिमाण्ड आयी है 3 दिन ओर लगेंगे दीवार नीचें से ही उठेगी अभी नहर बन्द नहीं कर सकते ।
- अरविन्द कुमार अधिशाषी अभियन्ता दायीं मुख्य नहर सीएडी कोटा

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