रहस्यमयी बीमारी की चपेट में झारखंड: एक ही परिवार के 4 लोगों की मौत, 2 की हालत गंभीर; रिम्स में मेडिकल बोर्ड गठित
अंधविश्वास की आशंका
रांची। झारखंड के पलामू जिले के पड़वा प्रखंड के सिक्का गांव में रहस्यमयी बीमारी से पिछले 10 दिनों में परिवार के चार सदस्यों की मौत हो चुकी है। शनिवार देर शाम रांची के रिम्स में इलाज के दौरान कुलदीप महतो की पुत्रवधू श्वेता देवी (28 वर्ष) ने दम तोड़ दिया। वह परिवार की चौथी सदस्य हैं, जिनकी इस बीमारी से मौत हुई है। फिलहाल परिवार के दो अन्य सदस्य – लाखो उर्फ लाखी देवी (52 वर्ष) और नकुल महतो (20 वर्ष) – रिम्स के क्रिटिकल केयर यूनिट में भर्ती हैं। डॉक्टरों के अनुसार दोनों की हालत गंभीर है और उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखकर इलाज किया जा रहा है।
प्रारंभिक लक्षणों के आधार पर एपिडेमिक ड्रॉप्सी (दूषित सरसों तेल के सेवन से होने वाली बीमारी) की आशंका जताई जा रही है, हालांकि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी के वास्तविक कारणों की पुष्टि हो सकेगी। रिम्स प्रबंधन आज श्वेता देवी के शव का पोस्टमार्टम कराने का निर्णय लिया जिसके लिए आज शव को कराया जाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य जांच के बाद ही मौत के सही कारणों का खुलासा हो सकेगा।
ग्रामीणों के अनुसार प्रभावित परिवार ओझा-गुनी पर विश्वास करता था। करीब छह माह पहले परिवार का एक सदस्य बीमार पड़ा था, जिसके बाद वे एक ओझा के पास गए। ओझा ने उन्हें भभूत देकर कहा था कि इसे खाने से बीमारी ठीक हो जाएगी। इसके बाद परिवार के सदस्य घर में रखे सरसों तेल में भभूत मिलाकर उसका सेवन करते रहे। बताया जा रहा है कि कुलदीप महतो ने कुछ दिन पहले ही स्थानीय मिल से सरसों का तेल पेरवाया था।
इस बीच राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर रविवार को रिम्स पहुंचे और पीड़ित परिवार के परिजनों से मुलाकात कर पूरी जानकारी ली। उन्होंने रिम्स निदेशक से बातचीत कर मामले की गंभीरता को देखते हुए मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया। मंत्री ने कहा कि बीमारी के कारणों की वैज्ञानिक तरीके से जांच कराई जाए और भर्ती मरीजों का बेहतर इलाज सुनिश्चित किया जाए। इस परिवार में सबसे पहले 19 जून को कुलदीप महतो की, 20 जून को उनकी पुत्री बबीता कुमारी और 26 जून को नाबालिग पुत्री इंदु कुमारी की मौत हुई थी। इसके बाद शनिवार को श्वेता देवी की भी जान चली गई।
स्थानीय चिकित्सकों का कहना है कि पहले हुई मौतों के पोस्टमार्टम की रिपोर्ट अब तक नहीं मिलने के कारण बीमारी की सही वजह का पता नहीं चल पाया है। मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एमएमसीएच) में फॉरेंसिक जांच की सुविधा नहीं होने से जांच प्रभावित हुई। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. श्रवण कुमार मेहता ने बताया कि काफी प्रयास के बाद परिवार के गंभीर मरीजों को रिम्स भेजा गया, क्योंकि वे पहले अस्पताल में इलाज कराने से कतरा रहे थे।

Comment List