कैश विवाद: जस्टिस यशवंत वर्मा ने दिया इस्तीफा; राष्ट्रपति को भेजा पत्र, दिल्ली स्थित घर में मिले थे जलते हुए नोट

इस्तीफा और विवाद: जस्टिस यशवंत वर्मा ने छोड़ा पद

कैश विवाद:  जस्टिस यशवंत वर्मा ने दिया इस्तीफा; राष्ट्रपति को भेजा पत्र, दिल्ली स्थित घर में मिले थे जलते हुए नोट

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। उनके आवास पर जले हुए नोट मिलने के बाद से वे विवादों में थे और उनके खिलाफ आंतरिक जांच व महाभियोग की चर्चा चल रही थी। फिलहाल वे न्यायिक कार्यों से दूर थे और मामले की जांच अभी जारी है।

नई दिल्ली। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इसके लिए उन्होनें राष्ट्रपति को पत्र लिखा है। दरअसल, वर्मा जब सुप्रीमकोर्ट में जस्टिस थे तब उनके सरकारी आवास के स्टोर में जलते हुए नोट मिले थे, जिसके बाद वर्मा को इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजा गया था। मीडिया के अनुसार, इस मामले में उनके खिलाफ आंतरिक जांच अभी तक चल रही थी और साथ ही महाभियोग की भी चर्चा चल रही थी। फिलहाल, उनको न्यायिक कार्य से अलग किया गया है और इस मामले में उनके खिलाफ जांच अभी भी जारी है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश यशवंत वर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने नौ अप्रैल को अपना इस्तीफा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को भेजा और इसकी एक प्रति उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को भी प्रेषित की है। न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने इस पत्र में लिखा, "मैं आपके गरिमामयी कार्यालय पर उन कारणों का बोझ नहीं डालना चाहता, जिन्होंने मुझे यह कदम उठाने पर विवश किया और मुझे यह पत्र प्रस्तुत करना पड़ रहा है। फिर भी अत्यंत पीड़ा के साथ मैं इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पद से तत्काल प्रभाव से अपना त्यागपत्र दे रहा हूं। इस पद पर सेवा करना मेरे लिए सम्मान की बात रही है।"

गौरतलब है कि वह पहले दिल्ली उच्च न्यायालय में कार्यरत थे और दिल्ली वाले घर में मार्च 2025 में भारी मात्रा में जले नोट मिलने के मामले में जांच के घेरे में आ गये थे। न्यायमूर्ति वर्मा को दिल्ली हाईकोर्ट से पिछले वर्ष इलाहाबाद भेजा गया था और उन्होंने वहां पांच अप्रैल को पद और गोपनीयता की शपथ ली थी। उनके खिलाफ आंतरिक जांच चल रही थी और इसी जांच के चलते उन्हें न्यायिक कार्य से अलग रखा गया था। उनके खिलाफ महाभियोग की भी तैयारी की जा रही थी।

उच्चतम न्यायालय ने उनके आवास पर जले हुए नोट मिलने के बाद इस मामले की आंतरिक जांच के लिए तीन जजों की एक कमेटी बनाई थी। इसके बाद चार मई को तीन वरिष्ठ जजों के इस पैनल ने अपनी रिपोर्ट उस समय के चीफ जस्टिस संजीव खन्ना को सौंप दी थी। अगस्त में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उनके खिलाफ आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय पैनल गठित किया था। इस समिति के सदस्यों में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अरविंद कुमार, बॉम्बे हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर और कर्नाटक उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता वासुदेव आचार्य शामिल हैं। श्री बिरला ने यह जांच समिति तब बनाई थी, जब लोकसभा के 146 सदस्यों ने न्यायमूर्ति वर्मा को हटाने के लिए महाभियोग का प्रस्ताव पेश किया।

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जांच समिति के सामने नौ अहम गवाह पेश किए जा चुके थे। न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने नौ अप्रैल को राष्ट्रपति को इस्तीफा भेजा और 10 अप्रैल को यह सार्वजनिक हुआ। उन्हें 10 से 14 अप्रैल के बीच अपना पक्ष रखना था। विधिक मामलों के जानकार सूत्रों का कहना है कि यशवंत वर्मा के इस्तीफा देने के बाद उनके खिलाफ चल रही महाभियोग की प्रक्रिया अब खत्म हो जाएगी।

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