खड़गे-राहुल ने किया केरलम में विधानसभा चुनाव प्रचार का शंखनाद: विपक्ष पर बोला हमला, इन मुद्दो को लेकर एलडीएफ सरकार को घेरा
केरलम चुनाव 2026: खरगे और राहुल का LDF-बीजेपी 'सीक्रेट डील' पर प्रहार
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने कोझिकोड से चुनावी हुंकार भरी। उन्होंने एलडीएफ (LDF) और केंद्र के बीच 'कम्युनिस्ट-जनता पार्टी' गठबंधन का आरोप लगाया। राहुल ने बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और नशाखोरी पर राज्य सरकार को घेरते हुए सवाल किया कि आखिर मुख्यमंत्री के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियां जांच क्यों नहीं कर रही हैं?
नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को केरलम में विधानसभा चुनाव प्रचार का शंखनाद करते हुए राज्य में वाम लोकतांत्रिक मोर्चा( एलडीएफ) और केंद्र सरकार पर दोनों पार्टियों के बीच अंदरूनी मिलीभगत को लेकर हमला बोला। पार्टी नेताओं ने राज्य की आर्थिक तंगहाली, स्वास्थ्य बदहाली, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, नशे के बढ़ते मामलों को लेकर भी एलडीएफ सरकार को पुरजोर तरीके से घेरा।
खरगे और राहुल ने आज केरलम के कोझिकोड में संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा(यूडीएफ) गठबंधन की जनसभा को संबोधित कर रहे थे। खरगे ने कहा कि केरलम में सत्तारूढ़ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और केंद्र सरकार के बीच एक गुप्त समझौता है, जिसका नाम 'कम्युनिस्ट-जनता पार्टी' है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार विधानसभा चुनाव में जानबूझकर कमजोर उम्मीदवार उतार रही है, ताकि एलडीएफ गठबंधन की मदद की जा सके। उन्होंने जोर दिया कि एलडीएफ धर्मनिरपेक्ष होने का दावा करती है, लेकिन वह केंद सरकार की मदद कर रही है और केंद्र सरकार को दिया गया हर वोट सीधे तौर पर एलडीएफ को उपहार है।
राहुल गांधी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि कल उनकी माता सोनिया गांधी अस्पताल में भर्ती हुईं थीं, इसलिए उन्हें उनके पास ही रुकना पड़ा। एलडीएफ-केंद्र सरकार के बीच मिलीभगत पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि देशभर में विपक्षी नेताओं के खिलाफ मामले दर्ज किए जाते हैं। उनके खिलाफ भी लगभग 40 मामले हैं। ईडी ने उनसे लगातार पांच दिनों तक पूछताछ की। लेकिन केंद्र सरकार केरलम के मुख्यमंत्री पर हमला क्यों नहीं करती और मुख्यमंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामलों को आगे क्यों नहीं बढ़ा रही है। उन्होंने इसे केंद्र सरकार और एलडीएफ के बीच मिलीभगत का सबसे बड़ा सबूत बताया।
उन्होंने बेरोजगारी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर हर वर्ष दो करोड़ नौकरियों का वादा किया था। उसी तर्ज पर केरलम के मुख्यमंत्री ने राज्य में 40 लाख नौकरियों का वादा किया था। लेकिन उन्होंने एक दशक में नौकरियां नहीं दी; बल्कि नौकरियां ही खत्म कर दीं। उन्होंने कहा कि राज्य में हर तीन में से एक युवा बेरोजगार है और ऐसे हालात में एलडीएफ शासन में पिछले दरवाजे से नियुक्तियां हो रही हैं। उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली और बढ़ती नशाखोरी का मुद्दा भी उठाया।

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