रेगिस्तान में मिला दुर्लभ कैरेकल का कुनबा, रेडियो कॉलर कैमरे में तस्वीरें कैद
वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की टीम कर रही है शोध
धोरों में विलुप्ति की कगार पर खड़े दुर्लभ वन्यजीव कैरेकल को लेकर उत्साहजनक खबर सामने आई। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और वन विभाग के संयुक्त प्रयासों के बीच घोटारू क्षेत्र में एक कैरेकल के कुनबे की आधिकारिक पुष्टि। रेडियो कॉलर और मोशन सेंसिंग कैमरों की मदद से विभाग को जैसलमेर में अब आधिकारिक तौर पर तीन कैरेकल होने के प्रमाण मिले।
जैसलमेर। धोरों में विलुप्ति की कगार पर खड़े दुर्लभ वन्यजीव कैरेकल को लेकर उत्साहजनक खबर सामने आई है। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और वन विभाग के संयुक्त प्रयासों के बीच घोटारू क्षेत्र में एक कैरेकल के कुनबे की आधिकारिक पुष्टि हुई है। रेडियो कॉलर और मोशन सेंसिंग कैमरों की मदद से विभाग को जैसलमेर में अब आधिकारिक तौर पर तीन कैरेकल होने के प्रमाण मिले हैं। जोधपुर के मुख्य वन संरक्षक अनूप केआर के अनुसार, जैसलमेर वन विभाग के डीएफओ देवेन्द्र सिंह भाटी की टीम इन दिनों अत्याधुनिक तकनीक के जरिए इस दुर्लभ बिल्ली पर नजर रख रही है।
करीब सात दिन पहले एक कैरेकल पर रेडियो कॉलर और मोशन सेंसिंग कैमेरा लगाया गया था, जिसके डेटा से अब उसके परिवार और मूवमेंट की सटीक जानकारी मिल रही है। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की टीम इस डेटा का उपयोग कैरेकल के शिकार के पैटर्न, उनके व्यवहार और थार की विषम परिस्थितियों में खुद को ढालने की उनकी क्षमता पर विस्तृत शोध कर रही है। यह वैज्ञानिक अध्ययन इस प्रजाति को बचाने के लिए भविष्य की रणनीति तैयार करने में मील का पत्थर साबित होगा।
माने जाते हैं दुनिया भर में बेहद दुर्लभ
जैसलमेर में पूर्व में हुई एक दुखद घटना, जिसमें दो युवकों ने एक कैरेकल को मारकर जला दिया था, उसके बाद प्रशासन अब पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। वन विभाग ने अब टोलियां बनाकर गांव-गांव में जागरूकता अभियान शुरू किया है। ग्रामीणों को समझाया जा रहा है कि कैरेकल पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन के लिए कितना महत्वपूर्ण है।
संरक्षण की नई उम्मीद
थार के रेगिस्तान में कैरेकल के कुनबे का मिलना वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। आधुनिक मॉनिटरिंग और सामुदायिक भागीदारी के जरिए वन विभाग का लक्ष्य जैसलमेर को कैरेकल के लिए एक सुरक्षित हैबिटेट के रूप में विकसित करना है।

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