भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को बड़ा झटका: ब्रिटेन हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, भारत में प्रत्यर्पण का रास्ता साफ

नीरव मोदी को बड़ा झटका: लंदन कोर्ट ने प्रत्यर्पण के खिलाफ याचिका की खारिज

भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को बड़ा झटका: ब्रिटेन हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, भारत में प्रत्यर्पण का रास्ता साफ

ब्रिटिश हाईकोर्ट ने भगोड़े कारोबारी नीरव मोदी की भारत प्रत्यर्पण रोकने वाली अपील को सिरे से खारिज कर दिया है। अदालत ने भारत सरकार के राजनयिक आश्वासनों को "विश्वसनीय और पर्याप्त" माना है। इस फैसले के साथ ही नीरव के भारत आने का रास्ता साफ हो गया है, क्योंकि कोर्ट ने असाधारण परिस्थितियों के अभाव में केस दोबारा खोलने से इनकार कर दिया।

नयी दिल्ली। ब्रिटेन के हाईकोर्ट ने भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को एक बड़ा झटका देते हुए उसके भारत में प्रत्यर्पण के खिलाफ अपील पर फिर से सुनवाई की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने केंद्र सरकार के ताजा आश्वासनों को पर्याप्त और विश्वसनीय मानते हुए यह फैसला सुनाया। लंदन स्थित रॉयल कोर्ट ऑफ जस्टिस की खंडपीठ ने 25 मार्च 2026 को दिए फैसले में कहा कि अपील को दोबारा खोलने के लिए 'असाधारण परिस्थितियों' की आवश्यकता होती है, जो इस मामले में मौजूद नहीं हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानूनी मापदंडों के आधार पर अपील को फिर से शुरू करने का कोई ठोस कारण नहीं है। यह निर्णय लॉर्ड जस्टिस स्टुअर्ट-स्मिथ और जस्टिस जे ने सुनाया।

गौरतलब है कि नीरव मोदी की याचिका मुख्य रूप से 2025 के एक अन्य अदालती फैसले पर आधारित थी, जिसमें भारत में पूछताछ के दौरान खराब व्यवहार की आशंका जताई गई थी। ब्रिटिश अदालत ने सुनवाई करते कहा कि भारत सरकार ने सितंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच "व्यापक, विस्तृत और विश्वसनीय" आश्वासन दिए हैं कि प्रत्यर्पण के बाद नीरव मोदी से किसी भी प्रकार की पूछताछ नहीं की जाएगी। भारतीय राजनयिक आश्वासनों के अनुसार, सीबीआई, प्रवर्तन निदेशालय या किसी अन्य भारतीय जांच एजेंसी को ब्रिटेन के अधिकारियों की पूर्व सहमति के बिना नीरव मोदी से पूछताछ करने की अनुमति नहीं होगी। अदालत ने कहा कि ये वादे राजनयिक स्तर पर बाध्यकारी हैं और यह मानने का कोई आधार नहीं है कि भारत अपनी प्रतिबद्धताओं के विपरीत कार्य करेगा।

जजों ने कहा कि भले ही भारत के भीतर कानून लागू करने को लेकर कुछ सैद्धांतिक सवाल बाकी हों, लेकिन दिए गए आश्वासनों का व्यावहारिक असर इतना काफी है कि इससे किसी भी तरह के प्रतिबंधित बर्ताव का कोई भी असली खतरा खत्म हो जाता है। मामले को समाप्त करते हुए, अदालत ने फैसला दिया कि अपील को दोबारा खोलना न तो ज़रूरी था और न ही सही। अदालत ने नीरव मोदी की अर्ज़ी को खारिज कर दिया है और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को पहले के आदेशों के मुताबिक आगे बढ़ाने की इजाज़त दे दी।

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