पश्चिम एशिया में शांति बहाली पर पाकिस्तान को महत्व देना भारत की कूटनीतिक विफलता: जयराम रमेश ने खड़े किए भारत की विदेश नीति पर गंभीर सवाल
कूटनीतिक विफलता: कांग्रेस का विदेश नीति पर कड़ा प्रहार
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पश्चिम एशिया संकट में पाकिस्तान को मध्यस्थ बनाए जाने पर मोदी सरकार को घेरा है। उन्होंने इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक विफलता बताते हुए कहा कि आतंकवाद को पनाह देने वाले देश को 'ब्रोकर' बनाना आपत्तिजनक है। जयराम ने डॉ. मनमोहन सिंह सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए वर्तमान विदेश नीति पर सवाल उठाए।
नई दिल्ली। कांग्रेस ने कहा है कि पश्चिम एशिया में शांति बहाली के वास्ते मध्यस्थ के रूप में आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले पाकिस्तान का नाम सामने आना भारत की कूटनीतिक विफलता है और अब विदेश मंत्री एस जयशंकर इस विफलता पर पर्दा डालने का प्रयास कर रहे हैं। कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने गुरुवार को एक बयान में कहा कि पाकिस्तान जैसे देश को मध्यस्थ के रूप में स्वीकार किया जाना बेहद आपत्तिजनक है। उनका कहना था कि पाकिस्तान लंबे समय से आतंकवाद को बढ़ावा देने, ओसामा बिन लादेन जैसे आतंकियों को पनाह देने, परमाणु अप्रसार नियमों के उल्लंघन और ए. क्यू. खान नेटवर्क के जरिए परमाणु प्रसार में शामिल रहा है। उसने अफगानिस्तान में नागरिक ठिकानों पर हमले किए और अपने ही नागरिकों तथा अल्पसंख्यकों के खिलाफ कार्रवाई की।
जयराम रमेश ने कहा कि 2008 के मुंबई हमले के बाद डॉ मनमोहन सिंह सरकार ने पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग कर दिया था, लेकिन हाल के घटनाक्रमों में ऐसा नहीं हो सका। उन्होंने आसिम मुनीर के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि इसके बावजूद पाकिस्तान विश्व मंच पर और प्रासंगिक बनता जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया "हमारी सरकार की कूटनीति, वैश्विक संपर्क और नैरेटिव प्रबंधन की कमजोरियों के कारण एक अस्थिर देश को 'ब्रोकर' की भूमिका मिल गई है, जो भारत की विदेश नीति पर गंभीर सवाल खड़े करता है।"

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