वकील बन कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंची ममता: चुनाव बाद हुई हिंसा मामले में करेंगी पैरवी, राज्य में कथित अशांति पर जताई चिंता
तोड़फोड़ और हिंसा की कथित घटनाओं से संबंधित जनहित पीआईएल पर सुनवाई
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव बाद हुई हिंसा के मामले में खुद पैरवी करने अधिवक्ता की पोशाक में कलकत्ता उच्च न्यायालय पहुंचीं। कोर्ट 2026 विधानसभा चुनावों के बाद हुई तोड़फोड़ और हिंसा से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। टीएमसी कार्यकर्ताओं पर हमलों के खिलाफ ममता का यह कड़ा रुख चर्चा में है।
कोलकाता। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी राज्य में चुनाव के बाद हुई हिंसा के संबंध में अपनी पार्टी की ओर से दायर एक मामले की व्यक्तिगत रूप से पैरवी करने के लिए गुरुवार सुबह अधिवक्ता की पोशाक में कलकत्ता उच्च न्यायालय पहुंचीं। कलकत्ता उच्च न्यायालय 2026 के पश्चिम बंगाल राज्य विधानसभा चुनावों के परिणाम घोषित होने के बाद तोड़फोड़ और हिंसा की कथित घटनाओं से संबंधित जनहित याचिकाओं (पीआईएल) पर सुनवाई करने के लिए तैयार है।
न्यायालय में सुनवाई के लिए एक साथ सूचीबद्ध की गई याचिकाओं में राज्य के कई हिस्सों में कथित अशांति पर चिंता जताई गई है। इनमें से एक याचिका वामपंथी नेता बिकाश रंजन भट्टाचार्य द्वारा दायर की गई थी, जिन्होंने चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद कोलकाता में न्यू मार्केट के पास बुलडोजर से किये गये कथित विध्वंस अभियान पर सवाल उठाया है।
एक अलग याचिका तृणमूल कांग्रेस नेता और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बंदोपाध्याय के बेटे शीर्षान्या बंदोपाध्याय द्वारा दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया है कि परिणामों के बाद कई जिलों में तृणमूल कार्यकर्ताओं और पार्टी के कार्यालयों को निशाना बनाया गया। दोनों मामलों को मुख्य न्यायाधीश की पीठ के समक्ष संयुक्त सुनवाई के लिए जोड़ दिया गया है। वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बंदोपाध्याय पार्टी प्रतिनिधियों के साथ अदालत में मौजूद थे। रिपोर्ट मिलने के समय तक न्यायालय की कार्यवाही जारी थी।

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