रूस के साथ टैंक वाली दोस्ती : भारत में बनेगा घातक टी-90 टैंक का नया वेरिएंट, मैन्यूफैक्चरिंग लागत में आएगी भारी कमी
लाइसेंस-प्रोडक्शन के लिए 2.8 बिलियन डॉलर का किया था एग्रीमेंट
भारत ने मेक इन इंडिया इनिशिएटिव के तहत 464 टी-90एमएस टैंकों के लाइसेंस-प्रोडक्शन के लिए 2.8 बिलियन डॉलर का एग्रीमेंट किया था।
मॉस्को। भारत और रूस अपनी टैंक वाली दोस्ती को और ज्यादा मजबूत करने जा रहे हैं। दरअसल, रूस ने भारत को टी-90 भीष्म टैंक के नए वेरिएंट का प्रोडक्शन शुरू करने में भारत की मदद करने के लिए सहमति व्यक्त की है। इस नए टैंक का नाम टी-90एमएस है। टी-90एमएस टैंक का प्रोडक्शन पहले से ही भारत में मौजूद टी-90 वेरिएंट बना रही मौजूदा फैसिलिटी में होगा। इससे भारत की मैन्यूफैक्चरिंग लागत में भारी कमी आएगी और बचे हुए पैसों का इस्तेमाल दूसरे कामों के लिए किया जाएगा। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 17 फरवरी को रोसोबोरोनएक्सपोर्ट ने कहा कि वह पहले से ही टी-90 वेरिएंट बना रही मौजूदा फैसिलिटी में टी-90एमएस का प्रोडक्शन शुरू करने में भारत की मदद करने के लिए तैयार है। 2019 में, भारत ने मेक इन इंडिया इनिशिएटिव के तहत 464 टी-90एमएस टैंकों के लाइसेंस-प्रोडक्शन के लिए 2.8 बिलियन डॉलर का एग्रीमेंट किया था।
टी-90एमएस टैंक की खासियतें जानें
टी-90एमएस टैंक में 125 मिमी की स्मूथबोर गन लगी है, जो पांच किलोमीटर तक गाइडेड मिसाइल दाग सकती है। इसे एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर और कलिना फायर-कंट्रोल सिस्टम का सपोर्ट मिला है। टी-90एमएस टैंक में 1,130-हॉर्सपावर का वी-92एस2एफ डीजल इंजन लगा है। इस टैंक की अनुमानित रेंज 550 किलोमीटर है और टॉप स्पीड 60 से 72 किमी/प्रति घंटा के बीच है। टी-90एमएस टैंक को तीन लोगों का क्रू आॅपरेट करता है। इसमें एक ऑटोमेटेड लोडर लगा हुआ है।
टी-90एमएस टैंक पहले से ज्यादा सुरक्षित
टी-90एमएस टैंकों में ब्लोआउट पैनल के साथ रीडिजाइन किया गया एम्युनिशन स्टोरेज लगा हुआ है, जो टैंक की सुरक्षा को बढ़ाता है। यह टैंक मौजूदा टी-90 भीष्म की जगह ले सकता है, जो भारतीय सेना का मुख्य युद्धक टैंक है। भारत ने टी-90 भीष्म को 2020 में चीन के साथ गलवान घाटी में हुए संघर्ष के बाद लद्दाख के अग्रिम इलाकों में तैनात किया था। टी-90 भीष्म को भारतीय सेना का रीढ़ माना जाता है।

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