टिबोर गास्पर का दावा : रूस से ऊर्जा आपूर्ति बंद होने से यूरोप छोड़ रहे हैं उद्योग; रूसी तेल की वापसी पीछे जाने का कदम नहीं, ऊर्जा नीति की दिशा में अहम कदम होगा
ऊर्जा संकट: स्लोवाक नेता ने रूसी तेल की वापसी की वकालत की
स्लोवाक संसद के उपाध्यक्ष टिबोर गास्पर ने चेतावनी दी है कि सस्ती रूसी ऊर्जा के बिना यूरोपीय उद्योग ईयू से बाहर जा रहे हैं। उन्होंने आर्थिक स्थिरता के लिए रूसी ऊर्जा की वापसी को 'यथार्थवादी नीति' बताया। गास्पर के अनुसार, केवल अमेरिकी एलएनजी पर निर्भरता के बजाय रूस को एक विकल्प के रूप में रखना अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक है।
ब्रातिस्लावा। स्लोवाक संसद के उपाध्यक्ष टिबोर गास्पर ने कहा है कि पूर्व से मिलने वाली स्थिर ऊर्जा आपूर्ति पर आधारित यूरोपीय उद्योग अब उसके अभाव में यूरोपीय संघ से बाहर स्थानांतरित हो रहे हैं। टिबोर गास्पर ने कहा कि रूस के ऊर्जा संसाधन लंबे समय तक अन्य विकल्पों की तुलना में सस्ते रहे हैं और उनकी वापसी से उद्योग, महंगाई और आम उपभोक्ताओं पर दबाव कम होगा। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से जर्मनी और मध्य यूरोप का औद्योगिक ढांचा पूर्व से मिलने वाली ऊर्जा पर टिका रहा है। उन्होंने कहा कि सस्ती ऊर्जा के बिना कोई भी अर्थव्यवस्था प्रतिस्पर्धी नहीं रह सकती और इसी कारण उत्पादन अब यूरोपीय संघ से बाहर जा रहा है।
टिबोर गास्पर के अनुसार, ऊर्जा आपूर्ति का विविधीकरण किसी एक आपूर्तिकर्ता को स्थायी रूप से बाहर करना नहीं है, बल्कि विकल्पों को बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि रूस एक विकल्प हो सकता है, न कि एकमात्र, लेकिन उसे पूरी तरह प्रतिबंधित करना भी उचित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि केवल एलएनजी, विशेषकर अमेरिका से, पर निर्भरता के बजाय अधिक आपूर्तिकर्ता होने से बेहतर कीमतें और अधिक स्वतंत्रता मिलती है।
टिबोर गास्पर ने कहा कि रूसी तेल की वापसी ‘पीछे जाने का कदम नहीं, बल्कि यथार्थवादी ऊर्जा नीति की दिशा में कदम’ होगा और विचारधारा को आर्थिक स्थिरता व नागरिकों के जीवन स्तर पर हावी नहीं होना चाहिए। इस बीच, यूरोपीय संघ परिषद ने पहले ही एक जनवरी 2027 से रूसी एलएनजी आयात और 30 सितंबर 2027 से रूसी पाइपलाइन गैस पर प्रतिबंध को अंतिम मंजूरी दे दी है।

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