उन्नाव दुष्कर्म मामला : कुलदीप सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, जमानत के आदेश पर लगाई रोक
मामले के तथ्य 'असाधारण' हैं।
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि आमतौर पर जमानत पर रिहा हुए व्यक्ति को सुने बिना उसके आदेश पर रोक नहीं लगाई जाती, लेकिन इस मामले के तथ्य 'असाधारण' हैं।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दिल्ली उच्च न्यायालय के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें उन्नाव दुष्कर्म मामले में उत्तर प्रदेश के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा पर रोक लगा दी थी और उन्हें जमानत दे दी थी। यह आदेश दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) पर सुनवाई करते हुए जारी किया गया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने आदेश जारी करते हुए कहा कि इस मामले में कानून के कई महत्वपूर्ण प्रश्न जुड़े हुए हैं। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि आमतौर पर जमानत पर रिहा हुए व्यक्ति को सुने बिना उसके आदेश पर रोक नहीं लगाई जाती, लेकिन इस मामले के तथ्य 'असाधारण' हैं।
न्यायालय ने जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। इस मामले में सीबीआई ने एक विशेष अनुमति याचिका दायर 26 दिसंबर, 2025 को दायर की थी। इसमें 23 दिसंबर के दिल्ली उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसने सेंगर की अपील लंबित रहने के दौरान उनके आजीवन कारावास की सजा पर रोक लगा दी थी। सेंगर को दिसंबर 2019 में एक विशेष सीबीआई अदालत ने उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के लिए दोषी ठहराया था और 25 लाख रुपये के जुर्माने के साथ आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
सेंगर ने जनवरी 2020 में दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष अपनी दोषसिद्धि के खिलाफ अपील दायर की थी और बाद में मार्च 2022 में अपनी सजा पर रोक लगाने की मांग करते हुए एक आवेदन प्रस्तुत किया था। उच्च न्यायालय ने 23 दिसंबर को अपने आदेश में सेंगर की सजा पर रोक लगा दी थी और उनकी अपील के निपटारे तक कुछ शर्तों के अधीन उन्हें जमानत दे दी। हालांकि सेंगर अभी भी जेल में बंद है क्योंकि वह पीड़तिा के पिता की गैर-इरादतन हत्या से संबंधित एक अलग सीबीआई मामले में 10 साल की सजा काट रहा है।

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