अमेरिकी सेना का ईरान पर हमला : वायु रक्षा और रडार प्रणाली को बनाया निशाना, अपाचे हेलीकॉप्टर को गिराने के जवाब में कार्रवाई

यह मिशन ईरान की अनुचित आक्रामकता का एक उचित जवाब

अमेरिकी सेना का ईरान पर हमला : वायु रक्षा और रडार प्रणाली को बनाया निशाना, अपाचे हेलीकॉप्टर को गिराने के जवाब में कार्रवाई
अमेरिकी अपाचे हेलिकॉप्टर गिराए जाने के बाद अमेरिका ने ईरान के वायु रक्षा तंत्र, रडार और ग्राउंड कंट्रोल स्टेशनों पर जवाबी हमले किए। सेंटकॉम ने इसे आत्मरक्षा बताया। जास्क, सिरिक और केशम द्वीप में धमाकों की खबरें हैं। ईरान ने विदेशी सैनिकों को क्षेत्र छोड़ने की चेतावनी देते हुए कहा कि वह कूटनीति के साथ अन्य विकल्प भी रखता है।

वॉशिंगटन। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि सेना के अपाचे हेलिकॉप्टर को गिराए जाने के जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान पर कई हमले किए। खबरों के अनुसार, इन हमलों में ईरान के वायु रक्षा एवं रडार प्रणाली को निशाना बनाया गया। सेंटकॉम ने एक्स पर लिखा, मंगलवार को अमेरिकी सेना के अपाचे हेलीकॉप्टर को गिराए जाने के जवाब में, कमांडर-इन-चीफ के निर्देश पर सेंटकॉम की सेनाओं ने शाम पांच बजे (21:00 जीएमटी) से ईरान के खिलाफ आत्मरक्षा में हमला शुरू किया। यह मिशन ईरान की अनुचित आक्रामकता का एक उचित जवाब है। मंगलवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में गश्त के दौरान इस्लामिक रिपब्लिक ने हेलीकॉप्टर को मार गिराया था। राष्ट्रपति ने इस बात पर बल दिया कि इस हमले का जवाब अमेरिका को जरूर देना चाहिए।

दक्षिणी ईरान के शहर जास्क, सिरिक और केशम द्वीप पर कई धमाकों की आवाज सुनी गई। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि सिरिक शहर पर हमले के दौरान अमेरिका ने दो जलाशय पर हमला किया। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी वायु रक्षा, ग्राउंड कंट्रोल स्टेशनों और सर्विलांस रडार को निशाना बनाकर कई बार हमले करने के बाद, सेंटकॉम ने कहा कि उसने अपाचे हेलीकॉप्टर पर हुए हमले के जवाब में ईरान पर अपने हमले पूरे कर लिए हैं। कमांड ने एक्स पर एक बयान में कहा, सेंटकॉम की सेना ने कमांडर-इन-चीफ़ के निर्देश पर नौ जून को ईरान के खिलाफ आत्मरक्षा में हमले किए। ये हमले कल अमेरिकी सेना के अपाचे हेलिकॉप्टर को गिराए जाने के जवाब में किए गए।

बयान में आगे कहा गया, यह ऑपरेशन अमेरिकी सेना और इलाके के पानी से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों पर हाल ही में हुए हमलों का एक उचित जवाब था। अमेरिकी सेना सतर्क है और ईरान की अनुचित आक्रामकता से बचाव के लिए तैयार है। इस घटना के बाद, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ईरान के पास तैनात विदेशी सैनिकों को वह इलाका छोड़ने की सलाह दी। उन्होंने चेतावनी दी कि तेहरान कूटनीति की भाषा में बात करना पसंद करता है लेकिन दूसरी भाषाएं भी बोल सकता है।

 

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