सीएस ऑफिस से जारी जून-2026 इम्पैक्ट असेसमेंट रिपोर्ट : दफ्तरों के चक्कर खत्म, डी-रेगुलेशन से निवेशकों की पहली पसंद बन रहा राजस्थान
राजस्थान में निवेशकों के लिए बदले नियम
जयपुर। राजस्थान में अब डी-रेगुलेशन फेज वन से निवेश करने की व्यवस्था में किए गए बदलाव के परिणाम सामने आने लगे है। अर्थात सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाने, अनावश्यक नियम कम करने और अधिकांश स्वीकृतियों को राजनिवेश सिंगल विंडो पोर्टल पर लाने के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। केवल जून महीने में 1,03,003.64 करोड़ रुपए के निवेश आशय प्राप्त हुए। अप्रैल से जून के बीच 30,017 आवेदन पोर्टल पर आए, जिनमें से 17 हजार से अधिक का निस्तारण हो चुका है।
आखिर डी-रेगुलेशन है क्या...
डी-रेगुलेशन का सीधा अर्थ है सरकारी प्रक्रियाओं को आसान बनाना, अनावश्यक नियम कम करना और मंजूरियों में लगने वाला समय घटाना। पहले निवेशकों को अलग-अलग विभागों में आवेदन करना पड़ता था। अब अधिकांश अनुमतियां एक ही ऑनलाइन प्लेटफॉर्म राजनिवेश के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं।
कैसे काम होता हैं
पोर्टल पर एमओयू के तहत आवेदन आता है, मुख्य विभाग उसकी जांच करता है, उसके बाद संबंधित विभाग स्वत: ही समस्त स्वीकृतियां ऑनलाइन देना शुरू कर देते है। इसकी सीएस नियमित मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
आम आदमी को इससे क्या फायदा
किसी भी निवेश का सबसे बड़ा लाभ आम नागरिक तक पहुंचता है। नई औद्योगिक इकाइयों के साथ रोजगार, व्यापार और स्थानीय सेवाओं की मांग बढ़ती है। इससे युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर बनेंगे। स्थानीय दुकानदारों और व्यापारियों की बिक्री बढ़ेगी। ट्रांसपोर्ट, होटल, रेस्टोरेंट और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को काम मिलेगा।
क्या बड़े बदलाव किए
सरकार ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं में चार प्रमुख सुधार लागू किए। पहला स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाया। दूसरा अधिकांश सेवाएं ऑनलाइन कीं। तीसरा जोखिम आधारित निरीक्षण प्रणाली लागू की। चौथा अनुपालन और कागजी औपचारिकताओं का बोझ कम किया।
दूसरे राज्यों के मुकाबले राजस्थान कहां खड़ा है
परंपरागत रूप से गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और कर्नाटक मजबूत औद्योगिक आधार, बेहतर बुनियादी ढांचे और बड़े विनिर्माण निवेश के कारण निवेशकों की पहली पसंद रहे हैं। डी-रेगुलेशन, सिंगल विंडो सिस्टम, ऑनलाइन मंजूरियां और स्वीकृति अवधि घटाने जैसे सुधारों के साथ राजस्थान भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
महिलाओं की बढ़ी भागीदारी
औद्योगिक इकाइयों में महिलाओं की भागीदारी 26 प्रतिशत से बढ़कर 32 प्रतिशत हो गई है। इस बदलाव के पीछे कई कारण बताए गए हैं, जिसमें सुरक्षित परिवहन, रात्रिकालीन सुरक्षा व्यवस्था, क्रेच सुविधा, कैंटीन, स्वच्छ शौचालय, शिकायत निवारण तंत्र शामिल है।
क्या केवल कागजों में है निवेश
विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश आशय का अर्थ यह नहीं कि पूरी राशि तुरंत निवेश में बदल जाएगी। वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी जब प्रस्तावित उद्योगों का निर्माण शुरू होगा, उत्पादन शुरू होगा और रोजगार पैदा होंगे।
राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य: क्यों महत्वपूर्ण है राजस्थान मॉडल
देशभर में राज्य सरकारें ईज ऑफ डूइंग बिजनेस सुधारों के जरिए निवेश आकर्षित करने की होड़ में हैं। राजस्थान ने हाल के वषोंर् में सिंगल विंडो सिस्टम, डिजिटल मंजूरियों और डी-रेगुलेशन पर विशेष जोर दिया है।
क्या कहते हैं आंकड़े
1.03 लाख करोड़ निवेश आशय
30,017 आवेदन
17,000 निस्तारित
बिजली मंजूरी का समय 50% कम
पर्यटन मंजूरी 6 दिन कम
नए निवेशकों को राजस्थान में निवेश करने में सरलता मिलेगी, जिससे नए उद्योग शीघ्रता से लगेंगे और रोजगार के नए अवसर बढेंगे। इससे राजस्थान में विकास की रफ्तार तेज होगी।
-सीताराम अग्रवाल, अध्यक्ष राजस्थान स्टील चैम्बर
यह पोर्टल राज्य में उद्योगों एवं निवेशकों को विभिन्न विभागों की अनुमतियां, स्वीकृतियां एवं सेवाएं एक ही डिजिटल मंच पर उपलब्ध कराकर निवेश प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी एवं समयबद्ध बना रहा है।
-वी. श्रीनिवास, मुख्य सचिव

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