बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग खतरे में

परिणाम गंभीर होंगे 

बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग खतरे में

भारत के खिलाफ लगातार जहर उगल रही बांग्लादेश की यूनुस सरकार को लगता था कि पाकिस्तान का साथ पाकर वह सफल हो जाएगा।

भारत के खिलाफ लगातार जहर उगल रही बांग्लादेश की यूनुस सरकार को लगता था कि पाकिस्तान का साथ पाकर वह सफल हो जाएगा। लेकिन, भारत ने ऐसा दांव खेला कि बिना कोई कदम उठाए या एक भी शब्द बोले बांग्लादेश की रीढ़ ही तोड़ दी। बांग्लादेश जिस उद्योग के दम पर सांसें ले रहा था, वही उद्योग अब अपनी आखिरी सांस गिन रहा है। इसकी वजह प्रत्यक्ष न सही, लेकिन परोक्ष रूप से भारत को ही बताया जा रहा है। एक्सपर्ट का कहना है कि भारत के सस्ते धागों के जाल में उलझकर बांग्लादेश कब बर्बादी के मुहाने पर खड़ा हो गया, उसे आभास भी नहीं हुआ। बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहे जाने वाले कपड़ा उद्योग पर अब गंभीर संकट के बादल छाने लगे हैं।

कारखानों पर ताले की नौबत :

हालात इतने बदतर हो गए हैं कि अगले महीने कई कारखानों पर ताला लगाने की नौबत आ गई है। बांग्लादेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन ने घोषणा की कि अगर जनवरी अंत तक यार्न के ड्यूटी फ्री आयात की सुविधा बहाल न हुई तो 1 फरवरी से देश की सभी स्पिनिंग यूनिटें उत्पादन बंद कर देंगी। राष्ट्रीय राजस्व बोर्ड ने वाणिज्य मंत्रालय की सिफारिश पर बॉन्डेड वेयरहाउस सिस्टम के तहत यह सुविधा निलंबित कर दी। सरकार का कहना है कि सस्ते आयात से घरेलू मिलें तबाह हो रही हैं। गारमेंट निर्यातक भारत से कॉटन यार्न 78 प्रतिशतद् और चीन से पॉलिएस्टर मंगा रहे हैं, जो स्थानीय उत्पाद से सस्ता और बेहतर है। 2025 में 70 करोड़ किलो यार्न आयात पर 2 अरब डॉलर खर्च हुए। पिछले 3 से 4 माह के गैस संकट ने हालात बिगाड़ दिए।

उत्पादन क्षमता गिर गई :

Read More विज्ञान में महिलाओं की भागीदारी विकास का सशक्त सूत्र

अनियमित आपूर्ति, ऊंची कीमतों से उत्पादन क्षमता 50 प्रतिशत गिर गई। उद्योग को 2 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है, वहीं मिल मालिकों को सब्सिडी और आर्थिक पैकेज का इंतजार है। चेयरमैन सलीम रहमान ने कहा, बाजार डंप हो गया। 12,000 करोड़ टका का स्टॉक पड़ा है। 50 से ज्यादा मिलें बंद, हजारों बेरोजगार। एसोसिएशन की मांगें स्पष्ट हैं कि 10 से 30 काउंट कॉटन यार्न पर ड्यूटी फ्री आयात समाप्त, गैस पर सब्सिडी व नियमित आपूर्ति में छूट, बैंक ऋणों पर ब्याज राहत, सरकार से संवाद। इस कदम से 10 लाख नौकरियां खतरे में हैं। अंतरिम सरकार को चेतावनी दी गई। मिलर्स और बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के बीच विवाद तेज। मिलर्स दावा करते हैं कि घरेलू क्षमता मांग पूरी कर सकती है।

बांग्लादेशी गारमेंट्स प्रभावित :

भारत के यार्न निर्यातक ने कहा,बॉन्डेड सुविधा हटने से बांग्लादेशी गारमेंट्स प्रभावित होंगे। गौरतलब है कि कपड़ा क्षेत्र बांग्लादेश अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, 80 प्रतिशत निर्यात और 40 लाख रोजगार इसी क्षेत्र से लोगों को मिलता है। गैस संकट, आयात निर्भरता और नीतिगत अनिश्चितता ने इसे कमजोर किया। अगर 1 फरवरी को मिलों पर ताले लगे तो आर्थिक मंदी और सामाजिक अशांति बढ़ सकती है। ज्ञात हो कि बांग्लादेश का सबसे बड़ा उद्योग कपड़ा है, जो दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक है। जारा और एचएनएम जैसे ब्रांड भी बांग्लादेश से बनकर जाते हैं, तब दुनिया पहनती है। बांग्लादेश अकेले हर साल करीब 47 अरब डॉलर के रेडीमेड कपड़े दुनिया को निर्यात करता है। इन कपड़ों को बनाने के लिए बांग्लादेश यार्न यानी धागे का आयात भारत से करता है।

कारोबार डूबने की कगार पर :

भारत से सस्ते धागे खरीदो, उससे कपड़े बनाओ और दुनिया को बेच दो। लेकिन, बांग्लादेश को इन सस्ते धागों की ऐसी लत पड़ी कि आज उसी धागे में उलझकर उसका अरबों डॉलर का कारोबार डूबने की कगार पर पहुंच गया है। आलम ये है कि उसके मिल मालिकों ने सरकार से साफ कहा है कि अगर कुछ नहीं किया तो 1 फरवरी से सारी कपड़ा मिलें बंद हो जाएंगी। बांग्लादेश में धागे का लोकल उत्पादन उतना नहीं होता, जितना उसके कपड़ा उद्योग को जरूरत है। लिहाजा वह भारत और चीन से सस्ते धागे का आयात करता है। भारत का धागा अच्छी क्वालिटी और सस्ता होने के नाते ज्यादा खरीदता है। उसे प्रति किलोग्राम 3 से 5 फीसदी सस्ता भी पड़ता है। भारत से सस्ते धागे का आयात इतना ज्यादा हुआ कि बांग्लादेश की लोकल मिलों के पास करीब 10 हजार करोड़ रुपये का स्टॉक जमा हो गया, जिसे खरीदने वाला कोई नहीं है।

परिणाम गंभीर होंगे :

एक तरफ तो बांग्लादेश के कपड़ा निर्यातक सस्ते धागे के आयात के पक्ष में हैं, क्योंकि लोकल धागा महंगा और क्वालिटी में भी अच्छा नहीं होता। अगर आयात बंद हुआ तो लागत बढ़ेगी और उत्पादन में देरी आएगी, जिससे ऑर्डर्स में कमी आ सकती है। अगर सरकार के कदम से आयात रुकता है तो उत्पादकों को ऊंची कीमतों पर लोकल धागा खरीदना पड़ेगा। गौरतलब है कि बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग पर भारत की हालिया कार्रवाइयों,जैसे लैंड बॉर्डर से आयात में सख्ती और व्यापार में बाधाओं का गहरा नकारात्मक असर पड़ने की संभावना है। इससे बांग्लादेशी परिधान की विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धात्मकता कम हो सकती है, उत्पादन लागत बढ़ सकती है, और कच्चा माल महंगा होने से वहां की स्पिनिंग मिलें बंद होने की कगार पर आ सकती हैं। यदि वहां की सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला, तो इसके आर्थिक और सामाजिक परिणाम गंभीर हो सकते हैं।

-अशोक भाटिया
यह लेखक के अपने विचार हैं।

Related Posts

Post Comment

Comment List

Latest News

परकोटे में गूंजेंगी ढूंढाड़ी भजनों की स्वर लहरियाँ : 11 से 14 मार्च तक आयोजित होगा 86वां श्री प्रेमभाया महोत्सव, चार दिवसीय भक्ति संगीत समारोह परकोटे में गूंजेंगी ढूंढाड़ी भजनों की स्वर लहरियाँ : 11 से 14 मार्च तक आयोजित होगा 86वां श्री प्रेमभाया महोत्सव, चार दिवसीय भक्ति संगीत समारोह
परकोटे की पुरानी बस्ती स्थित युगल कुटीर में 11 से 14 मार्च तक 86वां श्री प्रेमभाया महोत्सव आयोजित। चार दिन...
‘धुरंधर : द रिवेंज’ का ट्रेलर रिलीज : तेज रफ्तार एक्शन और थ्रिलर कहानी की दिखी झलक, रणवीर सिंह दो अवतारों में आएंगे नजर 
कैलादेवी मेले के लिए अस्थायी बस परमिट पर रोक की मांग : पड़ोसी राज्यों से बड़ी संख्या में पहुंचते है श्रद्धालु, रोडवेज प्रशासन द्वारा पर्याप्त संख्या में बसों का होता है संचालन
ईरान-इजरायल युद्ध का असर : जयपुर से 3 फ्लाइट्स रद्द, यात्रियों को काफी परेशानी
कुछ ‘मृत’ मतदाता अभी जीवित : ममता ने लगाया आरोप, बोली- जीवित लोगों को मृत बता रहा चुनाव आयोग
एसएमएस गोल्ड वास कप : विशाल के पंजे से कृष्णा पोलो फाइनल में पहुंची, कानोता पोलो को 7-5 से हराया 
आम आदमी पर फिर महंगाई की मार : घरेलू एलपीजी सिलेंडर 60 रुपये महांगा, वाणिज्यिक सिलेंडर में 114.50 रुपए की बढ़ोतरी