राज काज में क्या है खास, जानें

सोते रहो, आगे हम देख लेंगे

राज काज में क्या है खास, जानें
सूबे में शहरी सरकारों की चुनावी जंग में कैंडिडेट्स ने सात दिन तक दिन-रात ऐसी मेहनत की कि लोकतंत्र भी पसीना पोंछने लगा।
पहले जन सेवा और होटल सेवा :
 
सूबे में शहरी सरकारों की चुनावी जंग में कैंडिडेट्स ने सात दिन तक दिन-रात ऐसी मेहनत की कि लोकतंत्र भी पसीना पोंछने लगा। कोई वोटर के घर चाय पी रहा था, तो कोई पैर छूकर आशीर्वाद नहीं, सीधे वोट का स्क्रीनशॉट मांग रहा था और किसी ने गली के हर गड्डे को विकास का अवसर बताने में कोई कसर नहीं छोड़ी। वादों की ऐसी बरसात हुई कि लगा कि शहर का जल संकट खत्म हो गया। राज का काज करने वालों में खुसरफुसर है अब मतदान निपटने के बाद बाड़ाबंदी में चले गए, जो अब सात दिन बाड़े में ऐश-आराम करेंगे। कल तक जो नेता मतदाता को ढूंढते फिर रहे थे, अब उन्हें ढूंढने के लिए समर्थकों को होटल की लॉबी में चक्कर लगाने पड़ेंगे। कमरे में एसी, बाहर पहरा और भीतर लोकतंत्र की गहरी चिन्ता। और तो और अब मोबाइल पर रोज पूछा जाएगा कि भाई आराम से हैं ना, कोई दूसरी पार्टी तो परेशान नहीं कर रही। बेचारे मतदाता भी सोच रहे हैं कि हमने वोट दिया, अब हमारे प्रतिनिधि आराम करेंगे। आखिर लोकतंत्र में पब्लिक की सेवा का इतना सुंदर बाय वन, गेट वन ऑफर और कहां मिलेगा। 
 
रंग उड़ा रत्नों का :
 
पिंकसिटी में बुध को जो कुछ हुआ, उससे राज के रत्नों के साथ ही चोबदारों के चेहरों का भी रंग उड़ा हुआ है। बेचारे पांच दिन से न तो रात को नींद ले पा रहे और न दिन में चैन से बैठ पा रहे हैं। उनकी चिन्ता भी लाजिमी है, चूंकि अब तक सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में भगवा वालों के ठिकाने पर भीड़ का टोटा रहा है, लेकिन बुध को हुए रोड शो में ओनली पिंकसिटी के लोगों का हुजूम जो उमड़ पड़ा। राज का काज करने वालों में चर्चा है कि अब तो सूबे की पब्लिक भी समझ गई कि इन  के तिलों में तेल नहीं है, जो कुछ है, वह राज के पास है। सो जहां आसरा होता है, उधर ही लोगों के कदम बढते हैं। इस सच्चाई को राज के रत्न भी बखूबी जानते हैं, सो उनके चेहरों का रंग उड़ना लाजिमी है।
 
सोते रहो, आगे हम देख लेंगे :
 
सरदार पटेल मार्ग पर बने भगवा वालों के ठिकाने पर 15 दिन से एक चर्चा जोरों पर है। चर्चा भी छोटी-मोटी नहीं बल्कि हार्ड कोर वर्कर्स की बेरुखी को लेकर है, जिसने कइयों की नींद उडा रखी है। पिछले दिनों शहरी सरकारों की जंग के बीच सूबे के सैकड़ों हार्ड कोर वर्कर्स को दिल्ली की सड़कें नापने के साथ ही राजस्थान हाउस में बडें लोगों की हाजिरी भरने की इच्छा हुई। सो आनन-फानन में अपने-अपने बॉयोडेटा के साथ टोली बनाकर भरी दुपहरी जा पहुंचे आरएस। सबसे पहले मेवाड़ वाले एक साहब के रूम का दरवाजा खटखटाया, फिर मारवाड़ वाले और लास्ट में ढूंढाड़ वालों की देहली ढोकी, पर तीनों के दरबानों ने यह कहकर टरका दिया कि साहब अभी सो रहे हैं। हार्ड वर्कर्स का धीरज भी टूट गया, तो उनके मुंह से निकल पड़ा कि इस बार परमामेंट ही निपटा देंगे।
 
एक जुमला यह भी :
 
सूबे में इन दिनों एक जुमला जोरों पर है। जुमला भी छोटा-मोटा नहीं, बल्कि एवरी थिंग इज वेल को लेकर है। जुमला है कि जब से अटारी वाले भाई साहब ने एवरी थिंग इज वेल का मैसेज दिया है, तब से सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में आने वाले भाई लोगों की बांछें खिली हुई हैं। उनके चेहरों से चिंता की लकीरें काफूर हो गईं। अब हर कोई खुद को टेंशन फ्री मान रहे हैं और एक-दूसरे को अग्रिम बधाई देने में भी कोई कंजूसी नहीं बरत रहे। चर्चा है कि निकाय चुनावों में नतीजों को लेकर भगवा वाले ठिकाने पर एक बारगी तो मायूसी छा गई थी, लेकिन राज की कुर्सी संभाल रहे भाई साहब ने अपने गुप्तचरों से फीड बैक लेकर एवरी थिंग इज वेल का संदेशा दिया, तो सबकी बांछें खिल गईं।
 
-एल. एल. शर्मा
 
(यह लेखक के अपने विचार हैं)

 

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