राज काज में क्या है खास, जानें

अब और बढी चिन्ता

राज काज में क्या है खास, जानें
सूबे में होने वाले शहरी सरकारों के चुनावों में इस बार विपक्ष से पहले ही लोग मोर्चा खोले बैठे हैं।

अपनों से ही घिरे नेता :

सूबे में होने वाले शहरी सरकारों के चुनावों में इस बार विपक्ष से पहले ही लोग मोर्चा खोले बैठे हैं। भाजपा हो या कांग्रेस, टिकट की कतार ऐसी लगी है, मानों सरकारी नौकरी निकल आई हो। दोनों दलों में हर दावेदार के पास अपनी जीत का गणित है और दूसरे की हार का पूरा शोध पत्र। सबसे मजे की बात तो यह है कि टिकट मिलने से पहले नेताओं के चरित्र प्रमाण पत्र की समीक्षा शुरू हो गई। सालों से साथ चलने वाले साथी अब एक-दूसरे की फाइलें खोलने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। जो कल तक भाई साहब थे, आज वही पार्टी के लिए सबसे बड़ा खतरा बताए जा रहे हैं। टिकट के दावेदारों की धमकियां भी लोकतंत्र का नया अध्याय लिख रही हैं। राज का काज करने वाले भी लंच केबिनो में बतियाते हैं कि बेचारे टिकट बांटने वाले नेता दुविधा में हैं कि जीतने वाले को टिकट दें या नाराज होकर हराने वाले को मनाएं। फिलहाल दोनों दलों में चुनाव कम, महाभारत ज्यादा चल रहा है। जहां हर कोई खुद को अर्जुन और बाकी सबको को शकुनि समझ रहा है।

किस्मत नेता पुत्रों के हाथों में :

सूबे में निकायों के लिए चुनावी जंग क्या आई, पॉलिटिक्स में एक नया पदनाम पैदा हो गया। पदनाम भी छोटा-मोटा नहीं बल्कि भाग्यविधाता नेता पुत्र है। जिन हार्ड कोर वर्कर्स ने सालों तक पार्टी के झण्डे उठाने और नारे लगाने के साथ ही धूप-बारिश में पसीना बहाया, अब बेचारों की टिकट की किस्मत का फैसला, उन्हीं नेताओं की संतानें कर रही हैं, जिनके राजनीतिक संस्कार अभी घर की बैठकों से आगे बढ रहे हैं। इन दिनों जगह-जगह नेता पुत्रों की बैठकें चल रही हैं। बैठक में चहेते टिकटार्थियों की बाकायदा हाजिरी तक लगी है। और तो और मंडल अध्यक्षों तक को तलब किया गया है। सबका हिसाब-किताब भी  नेता पुत्रों ने अपनी डायरी में दर्ज किया है। बेचारे हार्ड कोर वर्कर्स भी सोच में हैं कि इतने सालों पार्टी की सेवा की, लेकिन टिकट का ओटीपी अब नेता पुत्र के मोबाइल पर आएगा। अब बेचारे पुराने वर्कर यही दुआ कर रहे हैं कि हे टिकट देवता, इस बार वंशवाद की वेटिंग लिस्ट से हमें बाहर निकालो।

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अब और बढी चिन्ता :

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सूबे में इन दिनों भगवा वाले भाई लोगों की चिन्ता और बढ़ गई। बढेÞ भी क्यों नहीं, जेन जी ने मैसेज जो दे दिया। सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने में चर्चा है कि यूथ के भरोसे सूबे की सरकार के अगले चुनावी जंग में उतरने का सपना देखने वाले लीडर्स को धरा पर उतर कर अभी से ही अपना आगा-पीछा देखने में फायदा है। वरना पिछले दिनों की तरह किरकिरी होने में कोई देर नहीं लगेगी। जेन जी ने भी खुले में मैसेज देने में कोई कसर नहीं छोड़ी कि हाईलेवल पर बैठे लीडर्स की मनमानी कतई नहीं चलेगी। जेन जी के इस मैसेज को समझने वाले समझ गए, ना समझे वो अनाड़ी है।

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एक जुमला यह भी :

सूबे में इन दिनों एक जुमला जोरों पर है। जुमला भी छोटा-मोटा नहीं बल्कि यूजीसी रोल बैक को लेकर है। दोनों बड़े दलों के ठिकानों में भी यूजीसी रोल बैक को लेकर अपना रुख साफ करने को बहस हुए बिना नहीं रहती। राज का काज करने वालों में चर्चा है कि भगवा के साथ ही हाथ वाले भाई लोगों का एक गुट भी यूजीसी को लेकर पार्टियों की नीति का खुलासा करने के पक्ष में है। सूबे के कई हिस्सों से ताल्लुक रखने वाले भाई साहबों ने तो मुंह खोल दिया है कि पार्टी के चुनावों पत्र में इसका जिक्र नहीं किया तो कुर्सी सिर्फ मुंगेरीलाल के सपने बन कर रह जाएगी। अगली कोर गु्रप की मीटिंग में चर्चा के लिए एक गुट ने अभी से दबाव भी बनाना चालू कर दिया है।              

-एल. एल. शर्मा

(यह लेखक के अपने विचार हैं)

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