पाठक के प्रति प्रतिबद्धता का संकल्प ना बदला है, ना बदलेगा

दैनिक नवज्योति का कोटा संस्करण स्थापना के 46वें वर्ष में प्रवेश कर रहा

पाठक के प्रति प्रतिबद्धता का संकल्प ना बदला है, ना बदलेगा
1981 में शुरू हुई कोटा संस्करण की यात्रा में पिछले साढ़े चार दशक में  बहुत कुछ बदला। खबरों का स्वरूप बदला, तकनीक बदली, समाज की अपेक्षाएं बदलीं और पत्रकारिता के सामने चुनौतियां भी बढ़ीं।

1981 में शुरू हुई कोटा संस्करण की यात्रा में पिछले साढ़े चार दशक में  बहुत कुछ बदला। खबरों का स्वरूप बदला, तकनीक बदली, समाज की अपेक्षाएं बदलीं और पत्रकारिता के सामने चुनौतियां भी बढ़ीं। लेकिन एक चीज न बदली है, न बदलेगी- पाठकों के प्रति हमारी प्रतिबद्धता और पत्रकारिता के उच्च आदर्शों के प्रति हमारा संकल्प। आज दैनिक नवज्योति का कोटा संस्करण स्थापना के 46वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। यह सिर्फ एक अखबार की उम्र का पड़ाव नहीं, बल्कि उन 45 वर्षों का उत्सव है, जिनमें हमने खबर को समाज की आवाज बनाने का प्रयास किया। इस यात्रा में पाठकों का विश्वास हमारी पूंजी रहा है। एजेंटों की मेहनत, संवाददाताओं की निष्ठा और विज्ञापन सहयोगियों का भरोसा हमारी ताकत बना। इस अवसर पर मैं सभी शुभचिंतकों के प्रति कृतज्ञता के साथ हृदय के अंतरतम से आभार व्यक्त करता हूं। यह सब मेरे पिता और दैनिक नवज्योति के प्रधान संपादक आदरणीय दीनबंधु चौधरी जी की दूरदृष्टि और मार्गदर्शन से संभव हो सका।  बीते वर्ष 189 से अधिक खबरों का सीधा असर प्रशासन पर पड़ा। हमारी 17 से अधिक खबरों पर न्यायालय ने प्रसंज्ञान लिया।

सरकारी अस्पताल में प्रसूताओं की मौत का मामला हमने प्रमुखता से उठाया तो स्वास्थ्य तंत्र हरकत में आया। जांच के लिए टीमें गठित हुईं और जयपुर से दिल्ली तक के विशेषज्ञ कोटा पहुंचे। बारिश से खराब हुई मुख्य सड़कों की तस्वीरें प्रकाशित हुईं तो अगले ही दिन प्रशासन सुधार के लिए दौड़ पड़ा। लखावा प्लांटेशन में गबन का मामला सामने आने के बाद एनजीटी ने अधिकारियों पर कार्रवाई और राशि वसूली के निर्देश दिए।   स्थानीय निकाय चुनाव में सभी 100 वार्डों की पड़ताल कर हमने मतदाताओं को तथ्यपरक जानकारी दी। कोटा के एयरपोर्ट, पर्यटन और विकास परियोजनाओं को लेकर भी हमारी मुहिम लगातार जारी रही। एयरपोर्ट निर्माण की समयबद्धता को लेकर डेडलाइन प्रकाशित करना इसी प्रतिबद्धता का हिस्सा था।  शिक्षा और खेल भी हमारी प्राथमिकताओं में रहे। लगातार खबरों के बाद कोटा संभाग को 102 शिक्षक मिले। खेल मैदानों की वास्तविक स्थिति सामने आने के बाद सरकार को खिलाड़ियों और मैदानों के लिए राशि स्वीकृत करनी पड़ी।

कोचिंग विद्यार्थियों की आत्महत्या के मामलों में हमने केवल आंकड़े नहीं गिनाए, बल्कि परिवारों की पीड़ा को आवाज दी। इसके बाद राज्य में कोचिंग संस्थानों के नियमन और विद्यार्थियों के कल्याण को लेकर नए प्रावधान लागू हुए। एआई, कॅरियर, शिक्षा, मेडिकल, स्टार्टअप, महिला सशक्तीकरण और बदलती अर्थव्यवस्था जैसे विषयों पर विशेषज्ञों के साथ परिचर्चाओं (टॉक शो) ने पाठकों को गंभीर विमर्श का मंच दिया। सामाजिक सरोकारों के तहत बच्चों, युवाओं और महिलाओं के लिए विभिन्न आयोजन भी हमारी यात्रा का हिस्सा रहे। करीब 90 वर्ष पहले मेरे दादाजी स्वर्गीय कप्तान दुर्गाप्रसाद चौधरी जी ने स्वतंत्रता आंदोलन की आग में जो ज्योति प्रज्वलित की थी, वही दैनिक नवज्योति आज लाखों पाठक परिवारों का हिस्सा बन गई है। इस यात्रा में हमने हमेशा तकनीक के साथ कदम से कदम मिलाते हुए समाचारों और विचारों की प्रस्तुति को समयानुकूल संवारा। अंत में मैं इतना कहूंगा

‘हमने ख्वाबों को हकीकत बनाने की ठानी है,

Read More राज काज में क्या है खास, जानें 

अभी हमारी मेहनत की निशानी बाकी है।

रास्ते मुश्किल हैं तो होने दो, हौसला कम नहीं,

अभी तो बाज की असली उड़ान बाकी है।’

-नरेन्द्र चौधरी, कोटा

 

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