आरआईसी में समीर ऐच की सशक्त कलाकृति का प्रदर्शन, प्रकृति और आदिम शक्ति का प्रभावशाली चित्रण
अपने कलात्मक जीवन की शुरुआत यथार्थवादी शैली से की
जयपुर। भारतीय समकालीन कला जगत के प्रसिद्ध चित्रकार समीर ऐच की एक विशिष्ट कलाकृति राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित "महान भारतीय कला गुरु" शीर्षक प्रदर्शनी में कला-प्रेमियों को आकर्षित कर रही है। यह कृति कलाकार की विशिष्ट भाव-प्रधान और अर्ध-अमूर्त शैली को दर्शाती है। गहरे रंगों की पृष्ठभूमि पर उभरती शक्तिशाली पशु-सदृश आकृति, तीखी रेखाओं, बिंदुओं, खुरदरी सतह और सीमित परंतु प्रभावशाली रंग-संयोजन से एक ऐसी दृश्य ऊर्जा उत्पन्न होती है जो पहली नजर में ही दर्शक का ध्यान खींच लेती है। आकृति में छिपा तनाव, आक्रामकता और आदिम शक्ति कलाकार की गहरी रचनात्मक दृष्टि को उजागर करती है। समीर ऐच का कला-संसार सदैव प्रकृति की मूल शक्तियों, पशु-चेतना और मानवीय संवेदनाओं से जुड़ा रहा है।
उन्होंने अपने कलात्मक जीवन की शुरुआत यथार्थवादी शैली से की, परंतु समय के साथ उनकी कला अर्ध-अमूर्त और भाव-प्रधान दिशा में विकसित हुई। खरोंच, बिंदु तथा विविध प्रयोगात्मक तकनीकों के प्रयोग से उनकी रचनाएं अत्यंत विशिष्ट बन जाती हैं। 1956 में पश्चिम बंगाल में जन्मे समीर ऐच ने 1978 में कोलकाता के सरकारी कला महाविद्यालय से शिक्षा पूर्ण की। तभी से वे चित्रकला और कला-शिक्षण के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहे हैं। उनकी कृतियों में आकृतियां केवल दृश्य रूप नहीं, बल्कि भाव, ऊर्जा और मनोवैज्ञानिक अनुभव का माध्यम बन जाती हैं। यह प्रदर्शनी 20 सितंबर तक जनता के अवलोकन हेतु खुली रहेगी।

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