महापौर और सभापतियों के लिए जोड़तोड़ तेज, निर्दलियों को अपने पक्ष में करने के लिए बड़े नेता सक्रिय
दोनों दलों ने बाड़ाबंदी कर रखी
जयपुर। प्रदेश में 309 निकायों के चुनावी नजीजे आने के बाद से ही भाजपा और कांग्रेस ने जोड़तोड़ शुरू कर दी है। जिन निकायों में दोनों दलों को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, वहां निर्दलियों को अपने पक्ष में करने के लिए बड़े नेता सक्रिय हो गए है। हालांकि, दोनों दलों ने बाड़ाबंदी कर रखी है। निर्दलियों से अपने पक्ष में महापौर, सभापति और पालिकाध्यक्षों के लिए हर तरीके से मनाया जा रहा है। पार्टियों के कुछ वरिष्ठ नेता निर्दलियों के परिजनों के संपर्क में भी है। नगर निगम पाली, अजमेर, भरतपुर, अलवर और जोधपुर में ये कवायत सबसे तेज है। चूंकि इन निगमों में निर्दलीय पार्षद किंगमेकर की भूमिका में रहेंगे।
अजमेर नगर निगम में कुल 80 वार्डों में से भाजपा को 27 और कांग्रेस को 37 में जीत मिली है। यहां 11 वार्डों में निर्दलीय जीते है। महापौर के लिए किसी भी दल को 41 वोटों की जरुरत है। इसी प्रकार पाली नगर निगम के कुल 65 वार्डों में से भाजपा को 21 और कांग्रेस को 29 में सफलता मिली है। यहां 15 वार्डों में निर्दलीय जीते है। महापौर के लिए किसी भी दल को 33 मतों की आवश्यकता है। इसी प्रकार 65 वार्डों वाले भरतपुर नगर निगम में भाजपा को 20 और कांग्रेस को 7 वार्डों में सफलता मिली है। यहां 36 वार्डों में निर्दलीय जीते है। महापौर के लिए 33 मतों की आवश्यकता है।
अलवर नगर निगम में भी कमोबेस यही हालात है। इस निगम में कुल 65 वार्डों में से भाजपा को 28 और कांग्रेस को 23 में जीत मिली है। यहां भी 13 वार्डों में निर्दलीय जीते है। महापौर के लिए 33 मतों की जरुरत है। सबसे रोचक मुकाबला जोधपुर नगर निगम में है। यहां 100 वार्डों में से भाजपा और कांग्रेस को बराबर 44-44 वार्डों में सफलता मिली है। जोधपुर में 11 वार्डों में निर्दलीय जीते है। यहां महापौर के लिए 51 मतों की आवश्यकता है।
प्रदेश के 47 नगर परिषदों में 27 में सभापति बनाने के लिए निर्दलीय किंगमेकर की भूमिका निभाएंगे। सत्तारूढ़ भाजपा हर हालत में नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पालिकाओं में जोड़तोड़ का सहारा लेकर अपने महापौर, सभापति और अध्यक्ष बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

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