पर्यावरण पर प्लास्टिक प्रदूषण का शिकंजा

प्लास्टिक प्रदूषण बड़ी समस्या

पर्यावरण पर प्लास्टिक प्रदूषण का शिकंजा

दुनियाभर में जितने भी आविष्कार हुए, वो मानव जाती के विकास में सहयोग हेतु हुए।

दुनियाभर में जितने भी आविष्कार हुए, वो मानव जाती के विकास में सहयोग हेतु हुए, परंतु मानव ने अपनी आवश्यकताओं की सीमा को तोड़कर मनमानी शुरू कर दी और अपने साथ ही समस्त जीव सृष्टि के लिए विनाश का बिगुल फूंक दिया। ऐसा ही प्लास्टिक प्रदूषण आज हमारे पृथ्वी के लिए बड़ी समस्या बना है। प्लास्टिक प्रदूषण ने जीवन के लिए खतरा पैदा किया है और यह खतरा तेजी से घातक स्तर पर बढ़ रहा है, फिर भी लोग समझने को तैयार नहीं है। हम अक्सर देखते हैं कि विशिष्ट प्लास्टिक बैग और अन्य प्लास्टिक सामग्री पर प्रतिबंध के बावजूद अवैध तरीके से धड़ल्ले से उपयोग की जाती है। प्लास्टिक प्रदूषण जीवन चक्र को बाधित करके नुकसान पहुंचा रहा है। प्लास्टिक का इस्तेमाल लगभग सभी औद्योगिक गतिविधियों में, निर्माण में, वाहनों से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि तक और सभी उपभोक्ताओं द्वारा किया जाता है।

दुनिया का अधिकतर प्लास्टिक प्रदूषण बोतलों, कैप, शॉपिंग बैग, कप, स्ट्रॉ जैसे सिंगल यूज उत्पादों से आता है। प्लास्टिक हजार साल तक नष्ट न होनेवाला अपशिष्ट है, चार दशकों में वैश्विक प्लास्टिक अपशिष्ट उत्पादन में सात गुना वृद्धि हुई है। एशिया वह क्षेत्र है, जो सबसे अधिक अप्रबंधित प्लास्टिक कचरा उत्पन्न करता है। प्लास्टिक प्रदूषण हमारे भोजन, पानी और हमारे द्वारा सांस ली जाने वाली ऑक्सीजन के माध्यम से भी हमारे शरीर में प्रवेश करता है। सौर विकिरण, हवाएं धाराओं और अन्य प्राकृतिक कारकों के कारण, प्लास्टिक माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक में टूट जाता है।

नैनोप्लास्टिक शरीर में सहज प्रवेश करने में सक्षम है। माइक्रोप्लास्टिक हमारे दिल, फेफड़े, लीवर, तिल्ली, गुर्दे और दिमाग में भी पाए गए हैं, और हाल ही में किए गए एक अध्ययन में नवजात शिशुओं के प्लेसेंटा में माइक्रोप्लास्टिक पाए गए। समुद्र में माइक्रोप्लास्टिक के टुकड़े होने के कारण, समुद्री जीव अक्सर प्लास्टिक निगल लेते हैं। जब समुद्री जलचर को मनुष्य खाते हैं, तो वह प्लास्टिक मनुष्य के शरीर में प्रवेश करता है। भारत प्लास्टिक प्रदूषण में दुनिया का सबसे बड़ा योगदानकर्ता बन गया है,जो कुल वैश्विक प्लास्टिक कचरे का लगभग 20 प्रतिशत है। प्लास्टिक बैग पशु मृत्यु को बढ़ावा देता है, यह बायोडिग्रेडेबल नहीं होते, प्लास्टिक बैग पेट्रोलियम उत्पादों से बनाए जाते हैं, इसके निर्माण के दौरान जहरीले रसायन निकलते है। प्लास्टिक बैग के बड़े जमाव से अक्सर जल निकासी व्यवस्था अवरुद्ध हो जाती है।

प्लास्टिक बैग बच्चों को फेफड़ों की जटिलताओं के जोखिम बढ़ाते है और महिलाओं में प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकते है, साथ ही प्लास्टिक पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है। प्लास्टिक बैग भूजल को प्रदूषित करते है, प्लास्टिक प्रदूषण प्राकृतिक खाद्य श्रृंखला को बाधित करता है। प्लास्टिक बैग के उत्पादन में बहुत अधिक पानी का उपयोग किया जाता है। अनभिज्ञता या लापरवाही कहें, लोग अक्सर गर्म खाद्यपदार्थों की पैकेजिंग के लिए प्लास्टिक कैरीबैग का उपयोग सहजता से करते हैं। हम अपने आसपास देखते हैं कि गर्म पेय, चाय, कॉफी भी छोटी-छोटी कैरीबैग में लेकर जाते है। होटल, रेस्टोरेंट या सड़कों पर गर्मागर्म खाना भी प्लास्टिक प्लेट में खाते है या प्लास्टिक कैरीबैग में पार्सल के तौर पर उपयोग करते है, जो सेहत के लिए काफी घातक होता है।

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प्लास्टिक बैग में गर्म खाद्यपदार्थ या अन्न सामग्री का उपयोग जहर के समान है, क्योंकि गर्म खाद्यपदार्थ प्लास्टिक के संपर्क में आते ही रासायनिक प्रक्रिया शुरू करते है, प्लास्टिक गर्म होते ही उससे निकलनेवाले घातक रसायन खाद्य पदार्थों में समाविष्ट हो जाते हैं और मनुष्य उस खाद्यपदार्थ का सेवन करके सीधे जानलेवा बीमारियों को आमंत्रित करता है। यह सब जानते हुए भी देश में बड़ी मात्रा में खाद्यपदार्थों के लिए प्लास्टिक का उपयोग बेखौफ तरीके से होता है। प्लास्टिक का उत्पादन उपभोक्ता की मांग को पूरा करने के लिए है, अगर हम उपभोक्ता ही प्लास्टिक से दूरी बना लें, तो समस्या काफी हद तक खत्म हो सकती है, प्लास्टिक के अन्य पर्याय को अपनाना और जागरूकता एवं पर्यावरण के बचाव के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति की आवश्यकता है। सबसे पहले अपना स्वार्थ और आलस छोड़ें, सरकारी नीतिनियमों का कड़ाई से पालन करें। फिर प्लास्टिक के संभवत पर्यायों का अवलंबन करें।

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उपयोग करो और फेंक दो जैसी वस्तुओं को ना कहें। प्लास्टिक कैरीबैग को पूर्णत भूल जाएं, खाद्यपदार्थों के पैकेजिंग में प्लास्टिक का उपयोग टाले। प्लास्टिक आज सुविधा परंतु जीवनभर के लिए दुविधा है यह समझें। पर्यावरण हमें बेहतर जीवन देने के लिए है, अगर हम ही अपने पर्यावरण को बर्बाद करेंगे तो पर्यावरण भी हमें जीवन नहीं अपितु बर्बादी ही देगा, इस बात की गंभीरता को समझें और जागरूक नागरिक का फर्ज निभाएं।

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-डॉ. प्रितम गेडाम
यह लेखक के अपने विचार हैं।

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