अलवर में भ्रष्टाचार: पार्षद तो छोटी मछली, मगरमच्छ पकड़ से दूर

सवाल ये है कि एक पार्षद की इतने बड़े भ्रष्टाचार की हिम्मत कैसे हुई, भ्रष्टाचार की कमाई ऊपर तक बंटती थी

अलवर में भ्रष्टाचार: पार्षद तो छोटी मछली, मगरमच्छ पकड़ से दूर

नगर परिषद् अलवर में सिविल कार्यों की निविदाओं में भ्रष्टाचार के मामले में पार्षद नरेन्द्र मीणा सहित दो ठेकेदार बीते गुरुवार पांच लाख पन्द्रह हजार की मोटी राशि सहित एसीबी के हत्थे चढ़ गए। इस कार्रवाई के बाद कई सवाल हैं।

अलवर। नगर परिषद् अलवर में सिविल कार्यों की निविदाओं में भ्रष्टाचार के मामले में पार्षद नरेन्द्र मीणा सहित दो ठेकेदार बीते गुरुवार पांच लाख पन्द्रह हजार की मोटी राशि सहित एसीबी के हत्थे चढ़ गए। इस कार्रवाई के बाद कई सवाल हैं। सबसे बड़ा सवाल तो ये है कि एक पार्षद की इतने बड़े भ्रष्टाचार की हैसियत कैसे हुई। साफ है कि पार्षद नरेन्द्र मीणा तो एक छोटी मछली है। मगरमच्छ तो दूसरे ही हैं। भ्रष्टाचार की कमाई ऊपर तक बंटती थी।मामले में तीनों आरोपियों को एसीबी कोर्ट ने तीन दिन के रिमांर्ड पर सौंपा। तीनों की रिमांड अवधि समाप्त होने पर सोमवार को एसीबी ने आरोपियों को फिर से कोर्ट में पेश किया। जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। एसीबी की इस कार्रवाई से भ्रष्टाचारियों में इस कदर खौफ छा गया कि नगर परिषद् को नरक परिषद् बना चुके कई जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं ठेकेदारों ने फोन बंद कर लिए। इससे साफ जाहिर होता है, कि नगर परिषद् में भ्रष्टाचार के खुले खेल में सभी लोग शामिल थे।

ठेकेदारों का पूल बनाकर कम दर पर ठेके का खेल
एक पार्षद स्तर का नेता नगर परिषद् की ओर से जारी निर्माण कार्यों की निविदाओं पर अपने चहेते ठेकेदारों का पूल बनाकर उन्हें 5 से 7 प्रतिशत ब्लो रेट पर टेंडर दिलवा रहा था। खास बात यह है, कि इनमें एक दर्जन से अधिक ऐसी फर्म हैं, जिन्हें ईएसआई व पीएफ जैसी शर्तों को दरकिनार करते हुए टेंडर दिए गए।


मंत्री और बड़े कांग्रेस नेताओं का करीबी
लोगों के बीच पार्षद नरेन्द्र मीणा की जिले के एक पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं राज्य के एक केबिनेट मंत्री सहित कांग्रेस के आला नेताओं से नजदीकियों को लेकर चर्चा है। राज्य सरकार में केबिनेट मंत्री के हर कार्यक्रम में पार्षद नरेन्द्र मीणा को मंच पर जगह मिलती रही है।  मीणा रिश्वत मामले में पकड़े जाने से पूर्व तक जिला कांग्रेस कमेटी के महासचिव के साथ ही प्रवक्ता भी थे। लोगों का कहना है कि केबिनेट मंत्री के सबसे कृपापात्र होने के कारण उनके हर कार्य को नरेन्द्र मीणा ही देखते थे। चाहे किसी को ठेका दिलवाना हो या फिर कोई डिजायर लिखवानी हो। इन सब कामों की फुल डीलिंग नरेन्द्र मीणा के हाथों  होती थी।

पार्षद नरेन्द्र मीणा को मिला मंत्री की नजदीकी का फायदा
अलवर से केबिनेट मंत्री बनने के साथ ही नरेन्द्र मीणा का कांग्रेस में रूतबा अचानक बढ़ गया। इससे पहले नरेन्द्र स्कीम नम्बर 5 स्थित मकान में रहते थे। लेकिन करीब तीन साल पहले मोती डूंगरी स्थित एक सोसायटी में फ्लैट लेकर केबिनेट मंत्री के पड़ौसी बन गए। तभी से नरेन्द्र मीणा का कद अचानक बढ़ता चला गया।

बीना गुप्ता के ट्रैप होने के बाद सभापति बनने की थी तैयारी
नगर परिषद् की पूर्व चेयरमैन बीना गुप्ता के रिश्वत प्रकरण में ट्रैप होने के बाद मंत्री का नजदीकी होने के कारण नरेन्द्र को ही चेयरमैन पद के चेहरे के रूप में देखा जा रहा था लेकिन कांग्रेस पार्षदों की आंतरिक कलह में क्रास वोट के डर से मुकेश सारवान को चेयरमैन बनाना पडा। इसमें नरेन्द्र मीणा की ही अहम भूमिका रही। यहां तक की मुकेश सारवान चेयरमैन बनते ही नगर परिषद् में नरेन्द्र मीणा के जयकारे लगाते दिखाई दिए। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है, कि चाहे नगर परिषद् में कोई भर्ती हो या फिर निविदा सहित अन्य कोई भी कार्य सबमें नरेन्द्र मीणा की सहमति सबसे जरूरी रहती थी।


आगाह कर रहे थे पार्षद
कुछ पार्षदों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर यहां तक कहा कि उनके द्वारा एसीबी की कार्रवाई से पहले कुछ दिनों से नरेन्द्र मीणा को बार-बार आगाह किया जा रहा था। लेकिन मंत्री के साथ नजदीकियों के चलते अति आत्मविश्वास के चलते एसीबी  प्रकरण हुआ। इससे पहले भी कई कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में नरेन्द्र को लेकर काफी नाराजगियां रही। पार्षद नरेन्द्र मीणा राजगढ़-लक्ष्मणगढ़ विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रहे थे।

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