27 सप्ताह की गर्भवती को गर्भपात की अनुमति, हाईकोर्ट ने कहा- नाबालिग रेप पीड़िता की गरिमा सर्वोपरि
इच्छा के विरुद्ध गर्भावस्था जारी रखने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता
राजस्थान हाईकोर्ट ने 27 सप्ताह 4 दिन की गर्भवती नाबालिग रेप पीड़िता को गर्भपात की अनुमति दी। कोर्ट ने कहा—किसी नाबालिग को उसकी इच्छा के खिलाफ गर्भ जारी रखने को मजबूर नहीं किया जा सकता। मेडिकल बोर्ड की निगरानी में प्रक्रिया होगी। हाईकोर्ट ने प्रशासन को इलाज, समन्वय, यात्रा और ठहरने की तत्काल व्यवस्था के निर्देश दिए।
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील मामले में 27 सप्ताह 4 दिन की गर्भवती नाबालिग रेप पीड़िता को गर्भपात कराने की अनुमति देते राज्य सरकार और जिला प्रशासन को तत्काल चिकित्सा एवं समन्वय संबंधी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि किसी भी नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता को उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भावस्था जारी रखने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट की एकलपीठ में सुनवाई करते न्यायाधीश मुकेश राजपुरोहित ने कहा कि गरिमा, शारीरिक स्वायत्तता, बॉडिली ऑटोनॉमी और प्रजनन संबंधी अधिकार संविधान के अनुच्छेद.21 के तहत संरक्षित मौलिक अधिकार है।
पीड़िता के अधिवक्ता सपना वैष्णव ने याचिका में बताया गया कि नाबालिग दुष्कर्म की शिकार हुई थी, लेकिन सामाजिक भय, पारिवारिक दबाव और जानकारी के अभाव में गर्भावस्था का पता काफी देर से चल पाया। बाद में मेडिकल जांच में सामने आया कि पीड़िता 27 सप्ताह से अधिक की गर्भवती है और गंभीर एनीमिया से भी पीड़ित है। मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में गर्भपात संभव है। हाईकोर्ट ने कलक्टर को पूरे मामले की मॉनिटरिंग करने, विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने और पीड़िता व उसके परिवार के यात्रा एवं ठहरने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

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