जलदाय की लंबित प्रकरणों से लेकर योजनाओं तक सवालों के घेरे में व्यवस्था, मंत्री ने रिपोर्ट सहित तलब किए अफसर
विभाग कई मोर्चों पर अपेक्षित प्रगति नहीं कर पा रहा
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग की 28 जनवरी 2026 की समीक्षा बैठक से पहले कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। लंबित अनुशासनात्मक मामलों, बजट कार्यों की धीमी प्रगति, जल जीवन मिशन व अमृत 2.0 योजनाओं में देरी, कमजोर राजस्व वसूली और ग्रीष्मकालीन जल योजना के अभाव से विभागीय लापरवाही उजागर हुई है।
जयपुर। जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग में 28 जनवरी 2026 को आयोजित होने वाली उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक से पहले विभागीय कार्यप्रणाली को लेकर कई नकारात्मक पहलू सामने आए हैं। जलदाय मंत्री की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक का एजेंडा ही यह संकेत दे रहा है कि विभाग कई मोर्चों पर अपेक्षित प्रगति नहीं कर पा रहा है।
सबसे चिंताजनक स्थिति विभाग में लंबे समय से लंबित अनुशासनात्मक जांच प्रकरणों (17 CCA, 16 CCA) की है, जो प्रशासनिक शिथिलता और जवाबदेही की कमी को दर्शाती है। इसके साथ ही बजट घोषणाओं के अंतर्गत स्वीकृत कार्यों की धीमी प्रगति भी सवाल खड़े कर रही है, जिससे आमजन को मिलने वाले लाभ प्रभावित हो रहे हैं।
जल जीवन मिशन के तहत वृहद परियोजनाओं, OTMP कार्यों तथा अंतर-विभागीय समन्वय की कमजोर स्थिति एजेंडे का प्रमुख हिस्सा है। यह स्पष्ट करता है कि समयबद्ध क्रियान्वयन के बजाय योजनाएं कागजों तक सीमित होती जा रही हैं। वहीं अमृत 2.0 योजना में लंबित कार्यादेशों की अधिकता यह दर्शाती है कि योजना की गति जमी हुई है। शहरी जल योजनाओं में जल राजस्व प्राप्ति, बकाया वसूली और उपभोक्ताओं को बिल वितरण की स्थिति भी संतोषजनक नहीं बताई जा रही है। ग्रीष्म संवर्धन कार्यों के लिए अब तक ठोस कार्ययोजना का अभाव आने वाले गर्मी के मौसम में जल संकट को और गहरा सकता है।
इसके अतिरिक्त अवैध जल कनेक्शनों को काटने के अभियान की जिलेवार प्रगति भी अपेक्षा के अनुरूप नहीं है। बैठक से पहले ही अधिकारियों से आंकड़े और पीपीटी मांगना इस बात का संकेत है कि जमीनी स्तर पर कार्यों की वास्तविक स्थिति को लेकर विभाग स्वयं आश्वस्त नहीं है। कुल मिलाकर, यह बैठक विभागीय कार्यों की समीक्षा से अधिक, वर्षों से चली आ रही लापरवाहियों और कमजोर क्रियान्वयन पर पर्दा उठाने वाली साबित हो सकती है।

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