नाहरगढ़ जैविक उद्यान वन्यजीव संरक्षण का नया केंद्र : बढ़ी प्रजातियों की संख्या, भेड़ियों के लिए तैयार हो रहा विशेष कंजर्वेशन एवं ब्रीडिंग सेंटर

महाराष्ट्र और यूपी से लाए गए वन्यजीवों में सफल प्रजनन

नाहरगढ़ जैविक उद्यान वन्यजीव संरक्षण का नया केंद्र : बढ़ी प्रजातियों की संख्या, भेड़ियों के लिए तैयार हो रहा विशेष कंजर्वेशन एवं ब्रीडिंग सेंटर

जयपुर स्थित नाहरगढ़ जैविक उद्यान देश में वन्यजीव संरक्षण और प्रजनन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा। देश के विभिन्न राज्यों के जैविक उद्यानों और चिड़ियाघरों से एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत यहां लाए गए कई वन्यजीवों में सफल प्रजनन।

जयपुर। जयपुर स्थित नाहरगढ़ जैविक उद्यान देश में वन्यजीव संरक्षण और प्रजनन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है। देश के विभिन्न राज्यों के जैविक उद्यानों और चिड़ियाघरों से एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत यहां लाए गए कई वन्यजीवों में सफल प्रजनन हो रहा है। जिससे इन दुर्लभ प्रजातियों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है।

बाघ, शेर और हिप्पो लाए गए यहां 
उद्यान प्रशासन के अनुसार पिछले कुछ सालों में उड़ीसा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली सहित कई राज्यों से बाघ, शेर, भालू, हिप्पो और मगरमच्छ जैसी प्रजातियों को यहां लाया गया था। अनुकूल वातावरण और बेहतर देखरेख के चलते इन वन्यजीवों में अच्छा प्रजनन हो रहा है। सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि उड़ीसा के नंदन कानन जैविक उद्यान से लाई गई बाधिन रानी रही। जिसने दो बार में कुल सात शावकों को जन्म दिया। वहीं दिल्ली से लाए गए हिप्पो के जोड़े में तीसरी बार सफल प्रजनन हुआ। उत्तर प्रदेश के लखनऊ चिड़ियाघर से लाए गए मगरमच्छों की संख्या भी बढ़ रही है। इसके अलावा शेर, चौसिंघा, बारहसिंघा और भालुओं की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है।

भेड़ियों के संरक्षण पर भी ध्यान 
नाहरगढ़ जैविक उद्यान में अब तक देश के कई प्रमुख चिड़ियाघरों जैसे जम्मू-कश्मीर जू, गुजरात के शकरबाग जू, नागपुर, सूरत, मैसूर, छतबीर जू (पंजाब) तथा छत्तीसगढ़ और बिलासपुर से भी विभिन्न वन्यजीव एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत लाए जा चुके हैं। इसी क्रम में उद्यान परिसर में भेड़ियों के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए कंजर्वेशन एवं ब्रीडिंग सेंटर का निर्माण कार्य चल रहा है। 

इनका कहना... 
एक्सचेंज कार्यक्रम के तहत लाए गए सभी वन्यजीवों की नियमित स्वास्थ्य जांच, पोषण प्रबंधन और व्यवहारिक निगरानी की जाती है। अच्छी देखभाल का ही परिणाम है कि नाहरगढ़ जैविक उद्यान आज सफल प्रजनन और संरक्षण का उदाहरण बनता जा 
रहा है।
-डॉ. अरविंद माथुर, उपनिदेशक, नाहरगढ़ 
जैविक उद्यान   

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