मेडिकल जेनेटिक्स ओपीडी शुरू होने के बाद 10 महीने में 2500 से अधिक केस, रेयर डिजीज डे पर आयोजित सेमिनार

सुबह सेंट्रल पार्क के हुई वॉक फॉर रेयर में 200 से अधिक लोगों ने की वॉक

मेडिकल जेनेटिक्स ओपीडी शुरू होने के बाद 10 महीने में 2500 से अधिक केस, रेयर डिजीज डे पर आयोजित सेमिनार

रेयर डिजीज अब नाम की रेयर। लगातार बढ़ती जागरूकता और स्क्रीनिंग से डॉक्टर्स के सामने उम्मीद से बढ़कर केस आ रहे। रेयर डिजीज डे के अवसर पर एसएमएस मेडिकल कॉलेज के मेडिकल जेनेटिक्स विभाग और रेयर डिजीज इंडिया फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित सेमिनार में विशेषज्ञों ने यह जानकारी दी।

जयपुर। रेयर डिजीज अब नाम की रेयर हैं। लगातार बढ़ती जागरूकता और स्क्रीनिंग से डॉक्टर्स के सामने उम्मीद से बढ़कर केस आ रहे हैं। रेयर डिजीज डे के अवसर पर एसएमएस मेडिकल कॉलेज के मेडिकल जेनेटिक्स विभाग और रेयर डिजीज इंडिया फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित सेमिनार में विशेषज्ञों ने यह जानकारी दी। डॉक्टर्स ने बताया कि अकेले राजस्थान में ही पिछले साल अप्रैल में शुरू हुई रेयर डिजीज क्लिनिक की ओपीडी में अब तक 10 महीने में 2500 से ज्यादा केस रजिस्टर्ड हो चुके हैं। इनमें 300 से अधिक मरीजों को भर्ती तक किया जा चुका है। 

7 हजार जेनेटिक बीमारियों में से 2039 बीमारियां इन्हेरिटेड मेटाबॉलिक डिसऑर्डर से संबंधित –
नोडल सेंटर फॉर रेयर डिजीज के इंचार्ज डॉ. प्रियांशु माथुर ने बताया कि अब तक दुनियाभर में 7 हजार से ज्यादा जेनेटिक बीमारियों का पता लगाया जा चुका है। इनमें से 2039 बीमारियां इन्हेरिटेड मेटाबॉलिक डिसऑर्डर (भोजन को शरीर में भोजन को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया में गड़बड़ी) से संबंधित हैं। इनमें बच्चों को डेवलपमेंट डिले, बेहोशी, वजन न बढ़ना, बार-बार गंभीर बीमार होने पर अस्पताल में भर्ती होना जैसे लक्षण सामने आते हैं। 

रेयर डिजीज इंडिया फाउंडेशन के डायरेक्टर सौरभ सिंह ने बताया कि भारत में दुर्लभ बीमारियों से ग्रसित मरीजों की संख्या काफी अधिक है, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण अक्सर इनके निदान में देरी हो जाती है। इसके अलावा एक पैनल डिस्कशन भी हुआ जिसमें डॉ. मनीषा गोयल, डॉ. रामबाबू शर्मा, डॉ. भावना शर्मा, डॉ. रूपेश, डॉ. सुधीर महर्षि, डॉ. गायत्री, डॉ. नेहा अग्रवाल सहित अन्य विशेषज्ञों ने दुर्लभ बीमारियों के मैनेजमेंट के लिए 'मल्टी-डिसिप्लिनरी अप्रोच' पर जोर दिया। डॉ. लोकेश अग्रवाल ने दुर्लभ बीमारियों के अवलोकन पर, डॉ. प्रदीप चौधरी ने न्यूबॉर्न स्क्रीनिंग पर और डॉ. पूजा चौधरी ने पारंपरिक से जीनोमिक डायग्नोस्टिक तकनीकों पर अपने अनुभव साझा किए। इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में जे.के. लोन अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आर. एन. सेहरा, विशिष्ट अतिथि पीडियाट्रिक मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ. कैलाश मीणा और सामाजिक कार्यकर्ता मनु कम्बोज उपस्थित रहे।

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