निम्स जयपुर की बड़ी उपलब्धि, सेल्फोस विषाक्तता से पीड़ित 21 वर्षीय युवक को ईसीएमओ के सहारे मिली नई जिंदगी
दो दिनों में अस्पताल से छुट्टी दिए जाने की तैयारी
जयपुर। निम्स अस्पताल, जयपुर ने एक बार फिर गंभीर एवं चुनौतीपूर्ण चिकित्सा उपचार में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। अस्पताल में सेल्फोस विषाक्तता से पीड़ित 21 वर्षीय युवक की जान बचाकर एक नई मिसाल कायम की गई है। कार्डियक सर्जन डॉ. रामचंद्र शेरावत ने बताया कि युवक ने सेल्फोस का सेवन कर लिया था, जिसके बाद उसकी स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई। सेल्फोस विषाक्तता को चिकित्सा विज्ञान में सबसे घातक जहरों में से एक माना जाता है। इसका सीधा प्रभाव हृदय पर पड़ता है, जिससे हृदय की पंपिंग क्षमता तेजी से घट जाती है और ज्यादातर मामलों में मरीज की अचानक मृत्यु हो जाती है। ऐसे मरीजों का उपचार चिकित्सकों के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण होता है। विषाक्तता के कारण युवक के हृदय और फेफड़ों की कार्यक्षमता बुरी तरह प्रभावित हो गई थी।
जांच में पाया गया कि युवक के हृदय की पंपिंग क्षमता घटकर मात्र 10 प्रतिशत रह गई थी, जिससे उसकी स्थिति बेहद नाजुक हो गई। मरीज को तत्काल ईसीएमओ सपोर्ट पर रखा गया। विशेषज्ञों के अनुसार भारत में सेल्फोस विषाक्तता के ऐसे गंभीर मामलों में, जहाँ ईसीएमओ की आवश्यकता पड़ती है, सफल उपचार के उदाहरण अत्यंत कम हैं। ईसीएमओ और गहन उपचार के बाद मरीज के हृदय की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ और उसकी पंपिंग क्षमता बढ़कर लगभग 60 प्रतिशत हो गई। अब मरीज तेजी से स्वस्थ हो रहा है और उसे अगले एक-दो दिनों में अस्पताल से छुट्टी दिए जाने की तैयारी की जा रही है।

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