द्रव्यवती नदी के संरक्षण के लिए बने कमेटी : अनट्रीटेड पानी सीधे ही नदी में छोडा जा रहा, हाईकोर्ट ने सरकार से मागा जवाब

पीएन मैंदोला की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए आदेश

द्रव्यवती नदी के संरक्षण के लिए बने कमेटी : अनट्रीटेड पानी सीधे ही नदी में छोडा जा रहा, हाईकोर्ट ने सरकार से मागा जवाब

द्रव्यवती नदी संरक्षण मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने विभागीय समन्वय के लिए कमेटी गठन की मंशा जताई है। अदालत ने इसे नीतिगत विषय बताते हुए सरकार से 28 अप्रैल तक जवाब मांगा। सुनवाई में अनट्रीटेड पानी, अवैध पंपिंग, कमजोर एसटीपी और औद्योगिक प्रदूषण के मुद्दे उठे, जिन पर कड़ी चिंता जताई गई।

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने शहर की द्रव्यवती नदी के संरक्षण से जुड़े मामले में न्यायमित्र के सुझाव पर सहमति जताते हुए विभागों में समन्वय के लिए कमेटी गठित करने की मंशा जताई है। अदालत ने कहा कमेटी गठित करने का नीतिगत निर्णय है। ऐसे में हम जनहित याचिका में निर्देश देंगे, तो यह कार्यपालिका के काम में हस्तक्षेप होगा। ऐसे में महाधिवक्ता सक्षम स्तर पर संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए कमेटी गठन को लेकर पक्ष रखें। इसके अलावा अदालत ने कहा है कि विभागों की ओर से अदालत में पक्ष रखने के लिए एक अतिरिक्त महाधिवक्ता को अधिकृत किया जाए। अदालत ने मामले में न्यायमित्रों की ओर से उठाए बिंदुओं को लेकर राज्य सरकार को 28 अप्रैल को जवाब देने को कहा है। एक्टिंग सीजे एसपी शर्मा और जस्टिस बीएस संधू की खंडपीठ ने यह आदेश पीएन मैंदोला की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।

सुनवाई के दौरान न्यायमित्र शोभित तिवाडी ने अदालत को बताया कि कई जगह अनट्रीटेड पानी सीधे ही नदी में छोडा जा रहा है। वहीं गोनेर में अवैध पंपिंग कर खेती की जा रही हे। एसटीपी प्लांट रिवर फ्रंट पर संसाधनों की भी कमी है। द्रव्यवती के प्लांट के सबस्टैंडर्ड होने के चलते चंदलाई बांध का पानी भी प्रभावित हो रहा है। न्यायमित्र ने कहा कि नदी के संरक्षण के लिए एक बोर्ड या कमेटी का गठन होना चाहिए, जो विभागों में समन्वय करे। दूसरी ओर मामले में नियुक्त एक अन्य न्यायमित्र अलंकृता शर्मा ने रिपोर्ट पेश कर कहा कि जनसंख्या के हिसाब से मौजूदा एसटीपी प्लांट की क्षमता को कम से कम तीन गुणा बढाने की जरूरत है। इसके अलावा नदी में पानी पर परत जमा है। जिससे साबित होता है कि फैक्ट्रियों का दूषित पानी सीधे ही नदी में छोडा जा रहा है। इसके साथ ही सरकार से इसकी जानकारी लेनी चाहिए कि क्षेत्र में कितनी औद्योगिक इकाइयां चल रही हैं। इनमें से कितनों के पास प्रदूषण बोर्ड की एनओसी नहीं है। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने मामले में कमेटी गठन की मंशा जताते हुए सरकार से जवाब मांगा है।

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