राजस्थान से आए पत्रकारों ने लखनऊ मेट्रो का किया अवलोकन: संचालन प्रणाली को करीब से समझा, काकोरी में चिकनकारी हस्तशिल्प कला का अवलोकन किया

राजस्थान के पत्रकारों ने जाना यूपी का विकास मॉडल

राजस्थान से आए पत्रकारों ने लखनऊ मेट्रो का किया अवलोकन: संचालन प्रणाली को करीब से समझा, काकोरी में चिकनकारी हस्तशिल्प कला का अवलोकन किया

भारत सरकार की योजना के तहत राजस्थान के पत्रकारों ने लखनऊ मेट्रो की अत्याधुनिक तकनीक और सुरक्षा प्रणालियों का अवलोकन किया। दल ने काकोरी में 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) के तहत स्थानीय महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों से संवाद कर चिकनकारी हस्तशिल्प की बारीकियों को समझा। यह दौरा उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे और महिला सशक्तिकरण की सफलता को दर्शाता है।

लखनऊ। भारत सरकार की डेवलपमेंट कम्युनिकेशन एंड इंफॉर्मेशन डिसेमिनेशन योजना के अंतर्गत जनकल्याणकारी योजनाओं एवं आधारभूत अवसंरचना विकास की जमीनी स्तर पर कवरेज के लिए राजस्थान से उत्तर प्रदेश पहुंचे पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मीडिया दौरे के दूसरे दिन गुरुवार उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कारपोरेशन के अंतर्गत लखनऊ मेट्रो का अवलोकन किया। इस दौरान राजस्थान से आए पत्रकारों ने लखनऊ मेट्रो के अत्याधुनिक संचालन तंत्रए सुरक्षा व्यवस्थाओं तथा यात्री सुविधाओं का नजदीक से अवलोकन किया। लखनऊ मेट्रो के संयुक्त महाप्रबंधक सुदीप सिंह एवं संयुक्त महाप्रबंधक (जनसंपर्क) पंचानन मिश्र ने मीडिया प्रतिनिधिमंडल को लखनऊ मेट्रो के कंट्रोल रूमए सिग्नलिंग सिस्टम और ट्रेन संचालन की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी। 

यूपीएमआरसी के अधिकारियों ने बताया कि लखनऊ मेट्रो अत्याधुनिक तकनीकों से लैस है, जो यात्रियों को सुरक्षित, तेज और सुविधाजनक परिवहन सेवा प्रदान करती है। राजस्थान से गए पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने मेट्रो में उपलब्ध स्वच्छता, समयबद्धता और स्मार्ट टिकटिंग प्रणाली की सराहना की। इसके बाद पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल ने लखनऊ के निकट स्थित गांव-गढ़ी, काकोरी का दौरा किया, जहां उन्होंने एक जिला एक उत्पाद के अंतर्गत आने वाले पारंपरिक चिकनकारी कार्य को नजदीक से देखा। इस दौरान पत्रकारों ने स्वयं सहायता समूह बनाकर काम करने वाली स्थानीय महिला कारीगरों से बातचीत की और चिकनकारी हस्तशिल्प से जुड़े उनके अनुभव, आजीविका के साधन तथा सरकार की विभिन्न योजनाओं से मिल रहे सहयोग के बारे में जानकारी प्राप्त की। स्वयं सहायता समूह में शामिल महिला कारीगरों ने बताया कि चिकनकारी न केवल उनकी आय का प्रमुख स्रोत है, बल्कि यह क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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