नीरजा मोदी स्कूल की संबद्धता वापस लेने वाला आदेश स्थगित: हाईकोर्ट ने कहा-स्कूल दस दिन में पांच लाख रुपए सीबीएसई में जमा कराए
राहत: नीरजा मोदी स्कूल की मान्यता रद्द करने पर हाईकोर्ट की रोक
राजस्थान हाईकोर्ट ने नीरजा मोदी स्कूल की कक्षा 11-12 की संबद्धता समाप्त करने वाले CBSE के आदेश पर सशर्त रोक लगा दी है। अदालत ने स्कूल को ₹5 लाख जमा कराने और एक माह में कमियां सुधारने का निर्देश दिया। छात्रा की आत्महत्या के बाद उपजे विवाद के बीच, छात्रों के भविष्य को देखते हुए यह अंतरिम राहत दी गई है।
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने नीरजा मोदी स्कूल में कक्षा चार की छात्रा के आत्महत्या करने से जुडेÞ मामले में सीबीएसई के गत 23 फरवरी के उस आदेश को सशर्त स्थगित कर दिया है, जिसके तहत बोर्ड ने स्कूल की कक्षा 11 व 12 की संबद्धता को दो साल के लिए वापस ले लिया था। अदालत ने कहा है कि इसके लिए स्कूल दस दिन में पांच लाख रुपए सीबीएसई में जमा कराए। इसके साथ ही स्कूल प्रशासन बोर्ड की ओर से गत 3 नवंबर को बताई सभी कमियों को एक माह में दुरुस्त करेगा।
अदालत ने कहा कि बोर्ड 45 दिन बाद स्कूल का निरीक्षण करेगा और यदि कोई कमी पाई जाती है तो अदालत में उसके खिलाफ प्रार्थना पत्र पेश किया जा सकता है। जस्टिस गणेश राम मीणा की एकलपीठ ने यह आदेश नीरजा मोदी स्कूल की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने बोर्ड को कहा है कि वह आगामी सुनवाई पर उन स्कूलों की सूची पेश करें, जिनमें वह याचिकाकर्ता के छात्रों को शिफ्ट करना चाहता है। इसके साथ ही इन संस्थानों की सत्यापन रिपोर्ट पेश कर बताया जाए कि इनमें बोर्ड की ओर से निर्धारित मापदंडों के अनुसार कोई कमी नहीं है।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एके शर्मा और अधिवक्ता रचित शर्मा ने कहा कि घटना के बाद संबंधित शिक्षक को हटा दिया गया है। सीबीएसई की ओर से बताई कमियों को भी दूर कर लिया गया है। शेष कमियों को एक माह में ठीक कर लिया जाएगा। याचिका में कहा गया कि सीबीएसई के आदेश से छात्रों के बीच अनिश्चितता पैदा हो गई है, जबकि इसमें उनकी कोई गलती नहीं है। सीबीएसई ने साल 2024 में स्कूल की मान्यता को मार्च, 2029 तक बढ़ाया था।
इसका विरोध करते हुए सीबीएसई के वकील एमएस राघव ने कहा कि स्कूल ने मान्यता संबंधी प्रावधानों की अवहेलना की है। ऐसे बोर्ड की कार्रवाई सही है। मृतक छात्रा के परिजनों की ओर से अधिवक्ता एसएस होरा ने कहा कि प्रावधानों की अवहेलना पर सीबीएसई को कार्रवाई का अधिकार है। याचिकाकर्ता स्कूल तय दिशा-निर्देशों की पालना नहीं कर रही है। सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने सीबीएसई के गत 23 फरवरी के आदेश को सशर्त स्थगित कर दिया है।

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