उड़ीसा में क्रॉस वोटिंग के बाद राजस्थान में बने जिलाध्यक्षों की कार्यशैली पर नजर, एप के जरिए बढ़ेगी मॉनिटरिंग
संगठन सृजन मॉडल: राजस्थान के 50 जिलाध्यक्षों पर 'ऐप' से कड़ी निगरानी
ओडिशा में क्रॉस वोटिंग के बाद कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान पर शक गहरा गया है। राजस्थान के 50 जिलाध्यक्षों की कार्यशैली और वैचारिक प्रतिबद्धता की अब ऐप के जरिए मॉनिटरिंग होगी। राहुल गांधी के इस मॉडल में दिग्गजों की सिफारिश के बिना नियुक्त 'लो-प्रोफाइल' चेहरों को अपनी वफादारी साबित करनी होगी, अन्यथा उन्हें पद से हटाया जाएगा।
जयपुर। उड़ीसा में संगठन सृजन अभियान के तहत बने जिलाध्यक्षों के राज्यसभा में क्रॉस वोटिंग करने के बाद अभियान में नियुक्त पदाधिकारियों पर शक गहराने लगा है। राजस्थान में भी बनाए गए 50 जिलाध्यक्षों की कार्यशैली पर अब नजर रखने की कवायद की जा रही है। एप के जरिए जिलाध्यक्षों की सक्रियता पर निगरानी रखी जा रही है। दरअसल, राहुल गांधी ने पार्टी के थिंक टैंक की सलाह पर यह मॉडल लागू किया था, जिसके तहत दूसरे राज्यों के पर्यवेक्षक तैनात करके तीन-तीन नामों के पैनल बनवाए गए। उससे पहले बड़े नेताओं की सिफारिश पर ही जिला अध्यक्ष बनाने का पार्टी में रिवाज था। ऐसे में स्थापित और दिग्गजों को नई प्रक्रिया हजम होती नजर नहीं आ रही।
अभियान में बने अधिकांश जिलाध्यक्षों को वरिष्ठ नेताओं से किसी तरह का सहयोग न के बराबर मिल रहा है। कार्यकारिणी घोषित करने में भी स्थानीय विधायकों,सांसदों और अन्य वरिष्ठ नेताओं को अपने नामों को एडजस्ट करने में दिक्कतें आ रही हैं। हालांकि नए फॉर्मूले में चयन प्रक्रिया के बाद राहुल गांधी के पास भी फीडबैक माध्यम से कई तरह की शिकायतें पहुंच रही हैं, लेकिन राहुल गांधी पूरी तरह अभियान के पक्ष में हैं,क्योंकि अभियान के तहत जिला अध्यक्षों को ताकतवर बनाने के लिए संगठन सृजन मॉडल अपनाया गया था।
इसके पीछे मकसद था दिग्गजों की सिफारिश के बिना जिला कप्तानों की नियुक्ति हो और उन्हें टिकट वितरण जैसी सियासी ताकत भी दी जाए, लेकिन अब उड़ीसा घटना के बाद फॉर्मूले पर फिर से सोचने को मजबूर कर दिया है। वैचारिक प्रतिबद्धता से हटने पर हटाए जाएंगे जिलाध्यक्ष: नए जिलाध्यक्षों का वैचारिक प्रतिबद्धता सहित कईं मापदंडों पर चयन हुआ था। अभियान के तहत कईं लो प्रोफाइल चेहरों को जिलाध्यक्ष बनाया गया,लेकिन अधिकांश जिला अध्यक्षों की दिग्गज नेताओं से पटरी नहीं बैठ रही। वहीं, कईं जिला अध्यक्ष अब भी पार्टी के निर्देशों पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं। अब सभी जिलाध्यक्षों की एप के जरिए मॉनिटरिंग की जाएगी और वैचारिक प्रतिबद्धता से हटने पर उन्हें हटाकर नई नियुक्तियां की जाएंगी।

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