एनलयू जोधपुर का दीक्षांत समारोह : 176 विद्यार्थियों को मिलीं उपाधियां, दिग्गज हस्तियों ने शिरकत की और युवा कानूनविदों का किया मार्गदर्शन
कानून भी समाज को अराजकता और असमानता से बचाने का एक किला
राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय जोधपुर का 18वां दीक्षांत समारोह शनिवार को विश्वविद्यालय परिसर में संपन्न हुआ। इस दौरान विधि जगत की कई दिग्गज हस्तियों ने शिरकत की और युवा कानूनविदों का मार्गदर्शन किया।
जोधपुर। राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय जोधपुर का 18वां दीक्षांत समारोह शनिवार को विश्वविद्यालय परिसर में संपन्न हुआ। इस दौरान विधि जगत की कई दिग्गज हस्तियों ने शिरकत की और युवा कानूनविदों का मार्गदर्शन किया। समारोह के मुख्य अतिथि सु्प्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने छात्रों को संबोधित करते कहा, जब आप अपनी डिग्रियों के साथ इस हॉल से बाहर निकलेंगे, तो मेरा आप सभी से विनम्र और दृढ़ आग्रह है, कि आप एक भ्रम से दूर रहें। वह भ्रम क्या है? यह विश्वास कि आपने जो कानून पढ़ा है, कानून कोई स्थिर इमारत नहीं है जिसके सिद्धांत हमेशा के लिए सिद्ध हो चुके हों।
उन्होंने ओलिवर वेंडेल होम्स को उद्धृत करते कहा, कानून का जीवन तर्क नहीं, बल्कि अनुभव रहा है। उन्होंने जोर दिया, कि बदलाव कानून की बाधा नहीं, बल्कि उसका 'लाइफ ब्लड' है। उन्होंने अपने संबोधन की शुरूआत जोधपुर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर मेहरानगढ़ किले का उल्लेख करते कहा, जैसे यह किला मरुस्थल की हवाओं में सदियों से मजबूती से खड़ा है, वैसे ही कानून भी समाज को अराजकता और असमानता से बचाने का एक किला है।
विस्तार की ओर बढ़ता संस्थान
न्यायाधीश संदीप मेहता ने विश्वविद्यालय की प्रगति की सराहना करते बताया, सेंटर फॉर एक्सीलेंस' पर काम शुरू हो चुका है। भविष्य के इनोवेटिव कोर्सेज के लिए लगभग 100 एकड़ जमीन की पहचान कर राज्य सरकार से आवंटन का अनुरोध किया गया है। चाहे आप कॉरपोरेट क्षेत्र, नीति-निर्माण या वकालत का मार्ग चुनें, अपने मूल्यों और पेशेवर नैतिकता को कभी न छोड़ें। विशेष रूप से वकालत का क्षेत्र धैर्य और साहस की मांग करता है, परंतु दीर्घकाल में यही मार्ग व्यक्तित्व को गहराई और दृढ़ता प्रदान करता है।

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