सावधान : जयपुर की हवा में फैले पोलन्स, अस्थमा-एलर्जी के मरीजों के लिए खतरा ; अस्पतालों में बढ़ेगी अस्थमा-एलर्जी मरीजों की संख्या
शहर के सेंट्रल पार्क और गांधी नगर जैसे क्षेत्रों में इनकी अधिक मात्रा
जयपुर की हवा में इन दिनों होलोप्टेलिया इंटीग्रिफोलिया पोलन्स फैल चुके हैं। इन्हें सामान्य भाषा में चिलबिल या बंदर की रोटी के नाम से जाना जाता है। इन पोलन्स यानी परागकण जयपुर के सबसे अधिक एलर्जेनिक परागकणों में से एक माने जाते हैं।
जयपुर। जयपुर की हवा में इन दिनों होलोप्टेलिया इंटीग्रिफोलिया पोलन्स फैल चुके हैं। इन्हें सामान्य भाषा में चिलबिल या बंदर की रोटी के नाम से जाना जाता है। इन पोलन्स यानी परागकण जयपुर के सबसे अधिक एलर्जेनिक परागकणों में से एक माने जाते हैं। इन पोलन्स के हवा में फैलने से अस्थमा और एलर्जी के मरीजों की मुसीबत बढ़ गई है। यह परागकण 1-2 महीनों तक हवा में बना रहता है।
क्या होता है होलोप्टेलिया इंटीग्रिफोलिया पोलन्स
कार्यकारी निदेशक एवं पल्मोनोलॉजिस्ट अस्थमा भवन जयपुर डॉ. निष्ठा सिंह ने बताया कि होलोप्टेलिया इंटीग्रिफोलिया पोलन्स जयपुर में व्यापक रूप से पाया जाता है, विशेषकर सड़कों और सार्वजनिक पाकार्े के आसपास जैसे सेंट्रल पार्क और गांधी नगर जैसे क्षेत्रों में इनकी अधिक मात्रा है। सुबह और शाम के समय परागकण की मात्रा अधिक रहती है। लगभग पांच प्रतिशत अस्थमा मरीज इस परागकण के प्रति संवेदनशील हो सकते हैं।
इन्हें अधिक सावधानी बरतने की जरूरत
अस्थमा ग्रसित लोग
एलर्जिक राइनाइटिस यानी नाक की एलर्जी वाले व्यक्ति
जिन लोगों को पोलन एलर्जी है
सामान्य लक्षण:
नाक बहना, छींक आना, नाक बंद होना
सांस लेने में तकलीफ, खांसी, सीटी जैसी आवाज
आंखों में खुजली और जलन
कुछ मामलों में त्वचा पर चकत्ते
ऐसे बचें:
सुबह और शाम के समय घर से बाहर की गतिविधियों को सीमित रखें
बाहर जाते समय ट्रिपल लेयर मास्क से नाक और मुंह को ढकें
पोलन के उच्च स्तर के समय खिडकियां बंद रखें
डॉक्टर द्वारा दी गई एंटी-एलर्जिक और इनहेलर दवाओं का नियमित उपयोग करें
लक्षण बढ़ने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें
कैसे लगाया जाता है पोलन्स का पता
डॉ. निष्ठा ने बताया कि इस परागकण का पता बर्कार्ड वॉल्यूमेट्रिक स्पोर ट्रैप सिस्टम की सहायता से लगाया गया है, जो हवा में मौजूद परागकणों की निगरानी के लिए एक गोल्ड स्टैंडर्ड उपकरण है। यह मशीन पिछले 15 वषोंर् से विद्याधर नगर स्थित अस्थमा भवन में स्थापित है और लगातार हवा का सैंपल लेकर परागकण की मात्रा की प्रति घन मीटर में मापती है।

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