जेएलएनएच के डॉक्टर बने देवदूत, मौत के मुहाने से खींचा मजदूर : दो टुकड़ों में विभक्त पेट का जटिल ऑपरेशन, विश्व में यह छठी मिसाल
टीम वर्क और एनेस्थीसिया की महत्वपूर्ण भूमिका
राजकीय जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय के सर्जन्स की टीम ने मौत के मुहाने पर पहुंच चुके एक मजदूर का त्वरित ऑपरेशन कर जीवनदान दिया है। भारत में इस तरह का यह पहला और विश्व में छठा ऑपरेशन है।
अजमेर। राजकीय जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय के सर्जन्स की टीम ने मौत के मुहाने पर पहुंच चुके एक मजदूर का त्वरित ऑपरेशन कर जीवनदान दिया है। भारत में इस तरह का यह पहला और विश्व में छठा ऑपरेशन है। मार्बल स्लैब के भारी दबाव व घर्षण के कारण मरीज का पेट फटकर दो टुकड़ों में विभक्त हो गया था और शरीर में कई स्थानों पर फ्रेक्चर भी हो गए थे। फिर भी सर्जन्स ने अत्यंत जटिल मेडिकल केस के गंभीर ट्रॉमा (पॉलीट्रॉमा) से मरीज को सुरक्षित बचा लिया। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य एवं नियंत्रक डॉ. अनिल सामरिया ने बताया कि मार्बल सिटी किशनगढ़ में भीषण औद्योगिक हादसे का शिकार हुए मजदूर के पेट (आमाशय) के दो टुकड़े हो गए थे।
अत्यंत गंभीर स्थिति में नेहरू अस्पताल लाए गए इस मरीज की जटिल सर्जरी कर डॉक्टरों ने उसे मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। मामले के अनुसार 11 फरवरी को किशनगढ़ की एक मार्बल फैक्ट्री में 29 वर्षीय नुरसेद पुत्र इस्लाम काम कर रहा था। उसी दौरान मार्बल के भारी-भरकम पत्थरों से लदी एक ट्रॉली अनियंत्रित होकर सीधे उसके पेट से जा टकराई। इस विशालकाय ट्रॉली और मार्बल स्लैब के भीषण दबाव और घर्षण ने नुरसेद के शरीर को बुरी तरह कुचल दिया।
टीम वर्क और एनेस्थीसिया की महत्वपूर्ण भूमिका
मरीज की इतनी सारी पसलियां टूटने और भारी मात्रा में खून बहने के कारण एनेस्थीसिया (बेहोशी) देना एक बहुत बड़ा जोखिम था लेकिन एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष एवं अधीक्षक डॉ. अरविंद खरे के निर्देशन में टीम डॉ. कुलदीप, डॉ. ज्योति व डॉ. एकता और सर्जनों के बेहतरीन तालमेल ने इस नामुमकिन काम को मुमकिन कर दिया। सर्जिकल टीम को प्रभारी डॉ. अनिल के. शर्मा, डॉ. पूर्णिमा सागर, डॉ. मेहुल सिंघल, डॉ. नमन सोमानी और डॉ. विपिन दीप सिंह शामिल थे। नसिंर्ग स्टाफ नवीन का भी अहम सहयोग रहा।

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