त्रियोदशी युक्त चतुर्दशी का दुर्लभ संयोग
महाशिवरात्रि : व्यतीपात योग, कुंभ राशि में सूर्य, बुध, राहु और शुक्र का चतुर्ग्रही योग भी बन रहा
14 फरवरी को शाम 4.02 बजे त्रयोदशी तिथि प्रारंभ होगी, जो 15 फ रवरी को शाम 5.05 बजे तक रहेगी। इसके बाद 15 फरवरी को शाम 5.06 बजे चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होकर 16 फरवरी को शाम 5.35 बजे तक रहेगी।
जयपुर। भगवान शिव की आराधना का महापर्व महाशिवरात्रि 15 फ रवरी को सर्वार्थ सिद्धि योग और त्रयोदशी युक्त चतुर्दशी के दुर्लभ संयोग में मनाई जाएगी। उत्तराषाढ़ा और श्रवण नक्षत्र के विशेष संयोग के साथ व्यतीपात योग एवं कुंभ राशि में सूर्य, बुध, राहु और शुक्र का चतुर्ग्रही योग भी बन रहा है। 14 फरवरी को शाम 4.02 बजे त्रयोदशी तिथि प्रारंभ होगी, जो 15 फ रवरी को शाम 5.05 बजे तक रहेगी। इसके बाद 15 फरवरी को शाम 5.06 बजे चतुर्दशी तिथि प्रारंभ होकर 16 फरवरी को शाम 5.35 बजे तक रहेगी। इस कारण 15 फरवरी को त्रयोदशी युक्त चतुर्दशी में महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। सुबह 7.08 बजे से शाम 7.48 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहेगा, जो सभी कार्यों की सिद्धि प्रदान करने वाला शुभ योग माना जाता है।
महाशिवरात्रि को महारात्रि भी कहा जाता है
महाशिवरात्रि को महारात्रि भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी की रात्रि में भगवान शिव लिंग रूप में प्रकट हुए थे। इसी कारण इस तिथि पर रात्रि जागरण और शिव पूजा का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार इस दिन चार प्रहर की पूजा की जाती है, जिससे धन, यश, प्रतिष्ठा और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
चार प्रहर की पूजा का समय यह रहेगा
प्रथम प्रहर सायं 6.15 से 9.28 बजे तक, द्वितीय प्रहर 9.29 से 12.41 बजे तक, तृतीय प्रहर 12.42 से प्रात: 3.54 बजे तक और चतुर्थ प्रहर 3.55 से 7.07 बजे तक। भक्तों को विधि-विधान से शिवलिंग का अभिषेक कर महामृत्युंजय मंत्र एवं पार्वतीपतये नम: मंत्र का जप करना चाहिए। महाशिवरात्रि पर पंचामृत, शहद, दही और गन्ने के रस से रुद्राभिषेक करना शुभ माना गया है। बेलपत्र, धतूरा, भांग, फ ल, मिष्ठान आदि अर्पित कर रात्रि जागरण करने से भगवान भोलेनाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है। श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं।

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