भर्ती परीक्षाओं में डमी कैंडिडेट गैंग का खुलासा : कमजोर अभ्यर्थी खुद की जगह अधिक योग्य उम्मीदवारों को बैठाकर लाखों में करते थे सौदा, 3अहम मामलों का पर्दाफाश
दोनों के बीच करीब 5 लाख रुपये में सौदा
राजस्थान में सरकारी भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता को चुनौती देने वाले डमी अभ्यर्थियों के संगठित गिरोह का स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप ने बड़ा खुलासा। जांच में सामने आया है कि कमजोर अभ्यर्थी खुद की जगह अधिक योग्य उम्मीदवारों को बैठाकर लाखों रुपये में सौदे करते थे।
जयपुर। राजस्थान में सरकारी भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता को चुनौती देने वाले डमी अभ्यर्थियों के संगठित गिरोह का स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) ने बड़ा खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि कमजोर अभ्यर्थी खुद की जगह अधिक योग्य उम्मीदवारों को बैठाकर लाखों रुपये में सौदे करते थे। SOG एडीजी विशाल बंसल ने बताया कि विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में धांधली के तीन अहम मामलों का पर्दाफाश किया गया है। इन मामलों में मूल अभ्यर्थियों ने जानबूझकर अपनी जगह डमी उम्मीदवारों को परीक्षा में बैठाया और इसके बदले भारी रकम दी गई। पहला मामला राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित प्राध्यापक हिन्दी परीक्षा-2022 का है। इसमें जालौर निवासी मनोहर लाल ने देराम की जगह परीक्षा दी। दोनों के बीच करीब 5 लाख रुपये में सौदा हुआ था।
मनोहर लाल ने प्रवेश पत्र और उपस्थिति पत्रक में फोटो व हस्ताक्षर बदलकर परीक्षा दी। उसे 1 मई 2026 को गिरफ्तार किया गया, जबकि मुख्य आरोपी देराम फरार है। दूसरे मामले में फलौदी निवासी अशोक जानी को डमी अभ्यर्थी के रूप में गिरफ्तार किया गया। उसने रामूराम (भूतपूर्व सैनिक) की जगह परीक्षा दी थी। इस सौदे में लगभग 7.5 लाख रुपये तय हुए थे। रामूराम को पहले ही गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जा चुका है, जबकि अशोक जानी को 30 अप्रैल 2026 को पकड़ा गया। तीसरा मामला शारीरिक शिक्षक भर्ती-2022 से जुड़ा है, जिसमें सुनील ने विमल कुमार की जगह परीक्षा दी। इस पूरे सौदे में 6 लाख रुपये तय हुए, जिसमें मध्यस्थ अनिल विश्नोई की अहम भूमिका रही।

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