आरजीएचएस में करोड़ों का फर्जीवाड़ा उजागर, डॉक्टर और लैब संचालक गिरफ्तार

जरूरत न होने पर भी महंगी जांचें लिखना

आरजीएचएस में करोड़ों का फर्जीवाड़ा उजागर, डॉक्टर और लैब संचालक गिरफ्तार

राजस्थान सरकार की राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम में धोखाधड़ी का मामला सामने आया। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप की जांच में खुलासा हुआ है कि कुछ डॉक्टरों और लैब संचालकों की मिलीभगत से फर्जी जांच, झूठी परामर्श पर्चियों और गलत रिपोर्ट अपलोड कर राज्य सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाया।

जयपुर। राजस्थान सरकार की राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) में धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की जांच में खुलासा हुआ है कि कुछ डॉक्टरों और लैब संचालकों की मिलीभगत से फर्जी जांच, झूठी परामर्श पर्चियों और गलत रिपोर्ट अपलोड कर राज्य सरकार को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाया गया। इस मामले में जांच कर डॉ. कमल कुमार अग्रवाल उर्फ  के.के. अग्रवाल (40), निवासी शिव वाटिका, मुरलीपुरा और डॉ. बनवारी लाल उर्फ  बी. लाल (65), निवासी लोहावास (सीकर), वर्तमान पता बसंत विहार संचालक को गिरफ्तार किया गया है। अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच जारी है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस, एसओजी विशाल बंसल ने बताया कि आमजन और सरकारी कर्मचारियों को नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा देने के लिए शुरू आरजीएचएस योजनाएं कुछ लोगों की अनियमितताओं के कारण प्रभावित हुई हैं। धोखाधड़ी से न केवल सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ है,बल्कि वास्तविक लाभार्थियों तक योजना का लाभ पहुंचने में भी बाधा आई है।

ऐसे हुआ फर्जीवाड़ा
जांच में सामने आया कि सीकर स्थित बी. लाल लैब के संचालक डॉ. बनवारी लाल उर्फ  बी. लाल ने एस.के. हॉस्पिटल, सीकर में कार्यरत डॉ. कमल कुमार अग्रवाल (एम.एस. ऑथार्े, एसोसिएट प्रोफेसर) और अन्य डॉक्टरों के साथ मिलकर योजनाबद्ध तरीके से फर्जीवाड़ा किया। आरोपियों ने मरीजों को बिना देखे फर्जी तरीके से परामर्श पर्चियां तैयार कीं और अनावश्यक जांचें, विशेष कर एमआरआईए लिखीं। इन फर्जी पर्चियों के आधार पर लैब द्वारा नकली जांच रिपोर्ट तैयार कर आरजीएचएस पोर्टल पर अपलोड की गईं और सरकार से भुगतान प्राप्त किया गया।

फर्जीवाड़े का तरीका 
बिना वास्तविक परामर्श के फर्जी पर्चियां बनाकर पोर्टल पर अपलोड करना।
जरूरत न होने पर भी महंगी जांचें लिखना।
सामान्य एमआरआई को कॉन्ट्रास्ट एमआरआई दिखाकर अधिक भुगतान लेना।
एक ही जांच को कई बार दिखाकर 5-6 रिपोर्ट अपलोड करना। 
डॉक्टर की अनुपस्थिति में भी फर्जी पर्चियां तैयार करना।
रिपोर्ट की तारीख बदलकर क्लेम लेना।
जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य।
एसओजी जांच में कई हैरान करने वाले मामले सामने आए।
एक मरीज की एमआरआई 4 दिसंबर 2023 को हुई, लेकिन उसे 5 दिसंबर दिखाकर भुगतान लिया गया। जबकि मरीज उस दिन सीकर आया ही नहीं था।
एक अन्य मामले में मरीज किसी दूसरे अस्पताल में भर्ती था, फिर भी उसके नाम पर फर्जी जांच रिपोर्ट अपलोड कर क्लेम लिया गया।
कई मामलों में प्राइवेट डॉक्टर के रेफरल को सरकारी डॉक्टर के नाम से दिखाकर भुगतान लिया गया।
कई मरीजों को यह तक जानकारी नहीं थी कि उनके नाम पर क्लेम उठाया गया है। 

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