धूमधाम से मनाया नंदोत्सव; भक्तों ने लूटी उछाल, धर्म की स्थापना के लिए जन्म लेते हैं भगवान: स्वामी दयानंद सरस्वती

नंदोत्सव का उल्लास: जयपुर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की धूम

धूमधाम से मनाया नंदोत्सव; भक्तों ने लूटी उछाल, धर्म की स्थापना के लिए जन्म लेते हैं भगवान: स्वामी दयानंद सरस्वती

राजापार्क में श्री साईं बाबा के 20वें वार्षिकोत्सव पर श्रीमद भागवत कथा में 'नंदोत्सव' धूमधाम से मनाया गया। श्रद्धालुओं ने भजन और झांकियों के बीच खिलौने और मेवे लुटाए। जगदगुरु परमहंसाचार्य ने धर्म और भक्ति का संदेश दिया। महोत्सव में बुधवार को गोवर्धन पूजा और 56 भोग का विशेष आयोजन किया जाएगा।

जयपुर। श्री साईं नाथ सेवा धाम समिति के तत्वावधान में व श्री साईं बाबा के 20वें वार्षिकोत्सव पर राजापार्क,सिंधी कॉलोनी के स्वामी सर्वानंद पार्क में चल रहे श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ समारोह के  चौथे दिन  मंगलवार  को भगवान श्री का जन्मोत्सव नंदोत्सव के रूप में मनाया गया। इस मौके पर नंद के आनंद भयो,जय कन्हैया लाल की.... यशोदा जायो ललना... गोविन्द मेरो है गोपाल मेरो है,......जैसे बधाई गीतों पर श्रद्धालुओं को खिलौने,मेवे व फल की खूब उछाल लुटाई। इस दौरान आसपास का क्षे़त्र भक्ति और आस्था के रंग में डूब गया। 

महोत्सव के मध्य श्रद्धालु श्री कृष्ण जन्मोत्सव की मनमोहक झांकी के दर्शन कर निहाल हो उठे।  इस अवसर पर जगदगुरु परमहंसाचार्य स्वामी दयानंद सरस्वती ने कहा कि जब-जब धरती पर अत्याचार बढ़ता है,तब-तब धर्म की स्थापना के लिए धरती पर अवतारी जन्म लेते है।संसार में जो सुख प्रभु  के भजन में है,वहीं सुख कहीे भी नहीं है।सदैव भगवान का ध्यान करते हुए उनका भजन करते रहना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि  नंदोत्सव हमें सिखाता है कि जीवन में जब भी कोई शुभ घटना घटे, उसका आनंद केवल अपने तक सीमित न रखें, बल्कि उसे समाज और संसार के साथ बाँटें। जैसे नंदबाबा ने अपने पुत्र के जन्म की खुशी पूरे व्रज में फैलाई, वैसे ही हमें भी प्रेम, करुणा और सद्भावना का प्रसार करना चाहिए।नंदोत्सव केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि आनंद, प्रेम और भक्ति का अद्भुत संगम है। यह वह पावन क्षण है जब व्रज में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद नंदबाबा ने पूरे गाँव में हर्ष और उल्लास का संदेश फैलाया। आयोजन से जुड़े निवर्तमान पार्षद घनश्याम चंदलानी ने बताया कि महोत्सव के तहत बुधवार को  भगवान श्रीकृष्ण की बाललीला के बाद गोवर्धन पूजा व 56 भोग सजाया जाएगा। उन्होंने बताया कि महोत्सव के तहत 12 को रासलीला के बाद रुकमणि विवाह की कथा के बाद अंतिम दिन सुदामा चरित्र,परीक्षित मोक्ष के बाद कथा की पूर्णाहुति के बाद पोथी विदाई होगी। कथा राेजाना साम 4बजे से रात्रि 8बजे तक होगी।

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