डिजिटल रियाज से हाईटेक ऑडिटोरियम तक विद्यार्थियों को मिलेंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं, स्मार्ट क्लासरूम से बदलेगा सीखने का तरीका
राष्ट्रीय स्तर के आयोजन की बढ़ेंगी संभावनाएं
राज्य सरकार ने केंद्र के पुनर्निर्माण और उन्नयन के लिए एक करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। इस राशि से भवन का रंग-रोगन, नई फॉल सीलिंग और आधारभूत संरचना को मजबूत किया जाएगा।
जयपुर। शास्त्रीय नृत्य की विरासत को संजोए हुए जयपुर कथक केन्द्र अब आधुनिकता की ओर कदम बढ़ा रहा है जिससे पारंपरिक कला को नई तकनीक के साथ जोड़ा जा सके। रीको की ओर से सीएसआर के तहत 25 लाख रुपए की वित्तीय सहायता स्वीकृत की गई है। इस सहयोग से केंद्र में पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ-साथ डिजिटल इंस्ट्रूमेंट्स जैसे ई-तबला और ई-संतूर उपलब्ध कराए जाएंगे।
स्मार्ट क्लासरूम से बदलेगा सीखने का तरीका
संस्थान में पढ़ाई के वातावरण को बेहतर बनाने के लिए क्लासरूम में एयर कंडीशनिंगए प्रोजेक्टर और कंप्यूटर-लैपटॉप लगाए जाएंगे। साथ ही नए फर्नीचर और आवश्यक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की व्यवस्था होगी।
लाइब्रेरी से जुड़ेगा सिद्धांत का ज्ञान
केंद्र में लाइब्रेरी की कमी को दूर किया जाएगा। प्रस्तावित लाइब्रेरी में कथक, संगीत और भारतीय शास्त्रीय कलाओं से संबंधित पुस्तकों का संग्रह होगा।
एक करोड़ से होगा व्यापक रिनोवेशन
राज्य सरकार ने केंद्र के पुनर्निर्माण और उन्नयन के लिए एक करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। इस राशि से भवन का रंग-रोगन, नई फॉल सीलिंग और आधारभूत संरचना को मजबूत किया जाएगा।
ऑडिटोरियम बनेगा आधुनिक प्रस्तुतियों का केंद्र
कथक केन्द्र का ऑडिटोरियम अब अत्याधुनिक तकनीक से लैस होगा। यहां नए लाइटिंग और साउंड सिस्टम लगाए जाएंगे।
राष्ट्रीय स्तर के आयोजन की बढ़ेंगी संभावनाएं
सुविधाओं के विस्तार के बाद यहां बड़े स्तर पर वर्कशॉप, सेमिनार और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। इससे न केवल जयपुर घराने की कथक शैली को नया मंच मिलेगा, बल्कि युवा कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर प्राप्त होंगे।
इनका कहना है...
180 से अधिक विद्यार्थी यहां प्रशिक्षण ले रहे हैं। रीको द्वारा सीएसआर के तहत 25 लाख की सहायता से संसाधन सुदृढ़ होंगे। नए व इलेक्ट्रॉनिक वाद्य यंत्र, आधुनिक सुविधाएं और बेहतर माहौल उपलब्ध कराना अब केंद्र की प्राथमिकता है।
-श्रुति मिश्रा
(सचिव, जयपुर कथक केन्द्र)

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