आरटीई कानून में नही मिल रहे प्रवेश : लगभग 1.90 लाख बच्चों को अब तक नहीं मिला प्रवेश, अभिभावक संघ का विरोध तेज
चयन के बावजूद आज तक बच्चों को स्कूलों में प्रवेश नहीं दिया जा रहा
आरटीई के तहत निजी स्कूलों में नि:शुल्क प्रवेश न मिलने पर विवाद। 50 दिन बाद भी करीब 1.90 लाख बच्चों को दाखिला नहीं मिला। संयुक्त अभिभावक संघ ने सरकार और शिक्षा विभाग पर विफलता का आरोप लगाया। शिक्षा संकुल पर बड़े विरोध प्रदर्शन की घोषणा।
जयपुर। शिक्षा का अधिकार आरटीई अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में नि:शुल्क प्रवेश के लिए जारी ऑनलाइन लॉटरी के 50 दिन बीत जाने के बावजूद प्रदेश के लगभग 1.90 लाख बच्चों को अब तक प्रवेश नहीं मिलना बेहद चिंताजनक एवं दुर्भाग्यपूर्ण है। संयुक्त अभिभावक संघ ने इसे सरकार और शिक्षा विभाग की गंभीर विफलता करार देते गुरुवार को प्रातः 11 बजे से शिक्षा संकुल, जेएलएन मार्ग के मुख्य द्वार बड़े स्तर विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है। प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू के अनुसार, इस वर्ष आरटीई के तहत 6 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने आवेदन किया, जिनमें से लगभग 2.40 लाख बच्चों का चयन 12 मार्च को शिक्षा मंत्री एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा लॉटरी के माध्यम से किया गया था।
चयन के बावजूद आज तक बच्चों को स्कूलों में प्रवेश नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बीते 50 दिनों में संयुक्त अभिभावक संघ सहित हजारों अभिभावक शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, शिक्षा सचिव, शिक्षा निदेशक, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, जिला शिक्षा अधिकारी एवं ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों के चक्कर काट चुके हैं, लेकिन न तो कोई संतोषजनक जवाब मिल रहा है और न ही बच्चों को प्रवेश। अधिकारी समस्या का समाधान करने की बजाय टाल-मटोल कर रहे हैं, जबकि कई निजी स्कूल संचालक खुले तौर पर चयनित विद्यार्थियों को पढ़ाने से मना कर रहे हैं। यह सीधे-सीधे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

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