जल जीवन मिशन घोटाले को लेकर 10 आरोपियों को जमानत नहीं : अदालत ने प्रार्थना-पत्रों को किया खारिज, कहा- मुकदमें के आरोपियों को जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता
प्रकरण में सुनवाई भी आरंभ नहीं हुई है और उसे पूरा होने में लंबा समय लगेगा
जल जीवन मिशन घोटाले में एसीबी मामलों की विशेष अदालत-1 ने जलदाय विभाग के 10 अधिकारियों की जमानत याचिकाएं खारिज। अदालत ने कहा कि आरोप गंभीर हैं और जांच अभी जारी। जमानत नहीं दी जा सकती।
जयपुर। एसीबी मामलों की विशेष अदालत क्रम-1 ने जल जीवन मिशन घोटाले से जुडे मामले में 10 आरोपियों और जलदाय विभाग के तत्कालीन व वर्तमान अधिकारियों दिनेश गोयल, कृष्णदीप गुप्ता, शुभांशु दीक्षित, सुशील शर्मा, विशाल सक्सेना, अरुण श्रीवास्तव, डीके गौड, महेन्द्र प्रकाश सोनी, निरिल कुमार और मुकेश पाठक के जमानत प्रार्थना पत्रों को खारिज कर दिया है। पीठासीन अधिकारी सुरेन्द्र कुमार ने अपने आदेश में कहा कि आरोपियों पर गंभीर अपराध करने के आरोप हैं और वर्तमान में अनुसंधान लंबित है। इसलिए मुकदमें के इस स्तर पर आरोपियों को जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। जमानत प्रार्थना पत्रों में कहा गया कि मामले में एफआईआर दर्ज होने के लंबे समय बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया है। प्रकरण में न तो उन्होंने रिश्वत मांगी और ना ही उसमें रिश्वत राशि बरामद हुई है। प्रकरण में सुनवाई भी आरंभ नहीं हुई है और उसे पूरा होने में लंबा समय लगेगा।
ऐसे में उन्हें जमानत पर रिहा किया जाए। जिसका विरोध करते हुए विशेष लोक अभियोजक ने कहा कि आरोपियों की भूमिका को लेकर एसीबी के पास पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं। अनुसंधान में आरोपियों का नाम सामने आने पर ही उनकी गिरफ्तारी हुई है और फिलहाल अनुसंधान चल रहा है। ऐसे में उन्हें जमानत नहीं दी जाए। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया है। गौरतलब है कि जल जीवन मिशन घोटाले को लेकर आरोप है कि ठेकेदारों ने टेंडर प्रक्रिया में गडबडी कर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर करोडों रुपए के टेंडर हासिल किए। प्रकरण में पूर्व में तत्कालीन जलदाय मंत्री महेश जोशी भी गिरफ्तार हुए थे और फिलहाल जमानत पर रिहा हैं।

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