अंग्रेजी माध्यम के स्कूल खोलने और हिंदी माध्यम के स्कूल बंद करने पर गरमाई सियासत: भाजपा ने गहलोत सरकार को घेरना किया शुरू
हिंदी मीडियम स्कूलों को बंद करके अंग्रेजी माध्यम में बदला जा रहा है ।
राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने बयान जारी कर कहा है कि सरकार बनेगी अंग्रेजी मीडियम स्कूल खोलें लेकिन हिंदी मीडियम स्कूलों का विकल्प खुला रखें।
जयपुर। सरकार के अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोलने और मौजूदा हिंदी माध्यम स्कूलों को ही अंग्रेजी में कन्वर्ट करने को लेकर राजस्थान की सियासत गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता खुलकर इसके खिलाफ गहलोत सरकार को घेर रहे हैं। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने बयान जारी कर कहा है कि सरकार बनेगी अंग्रेजी मीडियम स्कूल खोलें लेकिन हिंदी मीडियम स्कूलों का विकल्प खुला रखें। उन्होंने कहा कि मई माह में सरकार ने आदेश जारी कर कहा था कि हिंदी मीडियम के स्कूलों में जगह होने पर वहां अंग्रेजी मीडियम के स्कूल भी साथ-साथ चलाए जाएंगे लेकिन अब नए आदेश जारी कर दिए गए हैं ।जिसमें हिंदी मीडियम स्कूलों को बंद करके अंग्रेजी माध्यम में बदला जा रहा है । इसके कारण हिंदी माध्यम में पढ़ने वाले बच्चों के लिए परेशानी खड़ी हो गई है। बच्चों को हिंदी माध्यम में पढ़ने के लिए कई किलोमीटर दूर जाने की परेशानी सामने खड़ी है। ऐसे में उनका भविष्य चौपट होने की आशंका घर कर गई है। इसलिए सरकार को तुरंत हिंदी माध्यम स्कूलों को अनवरत चलाने के लिए फैसला करना चाहिए।
वहीं राजस्थान विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने वक्तव्य जारी कर कहा कि राज्य सरकार ने बजट 2022-23 के पैरा संख्या 26 में 5 हजार से अधिक की आबादी वाले समस्त गांवों में 1 हजार 200 महात्मा गांधी अंग्रेजी विद्यालय प्रारम्भ किये जाने की बजटीय घोषणा की थी, लेकिन दुर्भाग्य है कि सरकार अपनी घोषणा को अमलीजामा पहनाने के लिए इंग्लिश मीडियम के नये विद्यालय खोलने की बजाय वर्तमान में संचालित हो रहे बड़ी संख्या में हिंदी मीडियम के विद्यालयों को ही इंग्लिश मीडियम में परिवर्तित करके हिंदी मीडियम के लाखों विद्यार्थियों को शिक्षा से वंचित रखकर उनका भविष्य गर्त में ले जाने का काम कर रही है।
राठौड़ ने कहा कि झूठी घोषणाएं करने में अव्वल गहलोत सरकार राज्य में शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने पर आमादा है। राज्य के करीब 6 लाख बच्चों पर जबरन इंग्लिश मीडियम स्कूल थोपे जा रहे हैं। सरकार विगत 3 वर्षों में 1205 हिंदी मीडियम स्कूलों में ताला डालकर उन्हें इंग्लिश मीडियम स्कूलों में परिवर्तित कर चुकी है और अपनी इसी मानसिकता के साथ 2000 अतिरिक्त हिंदी मीडियम के स्कूलों को अंग्रेजी मीडियम में खोलने जा रही है।
राठौड़ ने कहा कि सरकार जिन हिंदी मीडियम स्कूलों को इंग्लिश मीडियम में परिवर्तित कर रही है वहां हिन्दी मीडियम के शिक्षक ही विद्यार्थियों को पढ़ा रहे हैं। सरकार ने बजटीय घोषणा में अंग्रेजी माध्यम के शिक्षकों का अलग से कैडर बनाकर 10 हजार शिक्षकों की भर्ती करने की भी घोषणा की थी जो अभी तक अधर में है। ना तो सरकार ने इंग्लिश मीडियम स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती की और ना ही हिन्दी मीडियम के विद्यार्थियों की शिक्षा का समुचित प्रबंध किया।
राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने इंग्लिश मीडियम स्कूल खोलने की थोथी घोषणा कर वाहवाही तो लूट ली लेकिन इन स्कूलों के लिए आधारभूत संरचनाएं जैसे भवन, शिक्षक व अन्य संसाधन की व्यवस्था ही नहीं की। इसके विपरीत अपनी कपोल कल्पित योजना को फलीभूत करने के लिए पहले से संचालित हो रहे हिंदी मीडियम स्कूलों को बंद कर इन्हें ही इंग्लिश मीडियम में परिवर्तित कर रही है जिससे बड़ी संख्या में हिंदी मीडियम के विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों के समक्ष पढ़ाई का संकट उत्पन्न हो गया है।
राठौड़ ने कहा कि सरकार के इस फैसले का सीधा व नकारात्मक असर हिंदी मीडियम के विद्यार्थियों पर पड रहा है। इसमें बड़ी संख्या में ऐसे विद्यार्थी हैं जो अंग्रेजी मीडियम के स्कूलों में पढ़ना नहीं चाहते हैं और अब अपने क्षेत्र में हिंदी मीडियम की स्कूल नहीं होने से 20-25 किमी तक दूर अन्यत्र जगह या निजी स्कूलों में एडमिशन लेने को मजबूर हैं।
राठौड़ ने कहा कि परफॉर्मेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इक्विलिटी(पीआईई) इंडेक्स 2020-21 के अनुसार प्राइमरी और सेकंडरी एजुकेशन में समानता, प्रदर्शन और इंफ्रास्ट्रक्चर के मापदंडों में राजस्थान देश में 8वें पायदान से खिसककर 13वें पायदान पर पहुंच गया है जिससे राज्य के शिक्षा विभाग के शैक्षणिक गुणवत्ताओं की कलई खुल रही है। वहीं गहलोत सरकार ने पूर्ववर्ती सरकार पर 20 हजार स्कूल बंद करने के झूठे आरोप लगाये थे लेकिन आज तक सरकार जिन स्कूलों को बंद करने का आरोप लगा रही थी उसे खोज तक नहीं पाई। भाजपा के प्रदेश प्रमुख प्रवक्ता और चोमू विधायक रामलाल शर्मा ने भी बयान जारी कर कहा है कि हिंदी माध्यम स्कूलों को बंद करने से हिंदी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों का भविष्य चौपाट हो रहा है सरकार उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। सरकार को चाहिए कि माध्यम की स्कूल खोलें लेकिन हिंदी माध्यम में पढ़ने वाले बच्चों का भी ख्याल रखा जाए।

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